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मंहगाई को काबू करना सबसे बड़ी चुनौती : कामथ

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के नए अध्यक्ष और देश के अग्रणी निजी बैंक के प्रमुख केवी कामथ ने गुरुवार को कहा है कि वर्तमान में देश के समक्ष मंहगाई को काबू करना सबसे बड़ी चुनौती है। सीआईआई के अध्यक्ष का पद संभालने के बाद अपने पहले संवाददाता सम्मेलन में कामथ ने कहा कि वर्तमान में देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती मंहगाई को काबू में करना है। उन्होंने कहा कि मंहगाई से कैसे निपटा जाए, यह सरकार का काम है, किंतु देश का उद्योग जगत और सीआईआई इसमें सरकार के सहयोगी रहंेगे। सीआईआई और उसके सदस्यों का प्रयास रहेगा कि कारखाना थोक मूल्य सूचकांक की मंहगाई को घटाकर साढ़े पांच प्रतिशत पर लाया जाए। कामथ ने मौजूदा में अर्थव्यवस्था के समक्ष की चुनौतियों को गिनाते हुए कहा कि ईंधन, जिंस और उपभोक्ता उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी, भुगतान संतुलन का दबाव, आपूर्ति कमी का बढ़ना, बुनियादी सुविधाआें के अंतर का बढ़ना, समान विकास और कृषि उत्पादन और उत्पादकता में ठहराव इनमें मुख्य हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी और घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूत चुनौतियों के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था काफी सुदृढ़ है और इसके चालू वित्त वर्ष में 8.3 से 8.6 प्रतिशत तक आर्थिक गति हासिल करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य की आर्थिक गति के प्रति आशावादी होने के साथ.साथ सीआईआई का मानना है कि मध्यकालिक लिहाज से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में दस प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की जा सकती है। कामथ ने कहा कि अर्थव्यवस्था के समक्ष वर्तमान में जो भी चुनौतियां है, उनका बड़ी सावधानी से मुकाबला करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मंहगाई की ऊंची दर को देखते हुए तेल कीमतों के बारे में सोचना संभव नहीं है किंतु निकट भविष्य में मंहगाई की स्थिति को देखते हुए यह एक उपाय हो सकता है जिससे देश ऊर्जा को अधिक कुशलता से इस्तेमाल कर स्वयं के लिए सरंक्षण का लक्ष्य तय कर सकता है। देश में बुनियादी सुविधाआें की कमी का जिक्र करते हुए कामथ ने कहा कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश की जरूरत है। देश को वर्ष 2015 तक इस क्षेत्र में 600 अरब डॉलर निवेश की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था की तीव्र विकास दर को बनाए रखने के लिए इस क्षेत्र पर खासा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। खाद्यान्नों की कमी और इनके दामों में बढ़ोतरी की चर्चा करते हुए सीआईआई अध्यक्ष ने कृषि क्षेत्र में सुधारों की तुरंत जरूरत की वकालत करते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक आदर्श भूमि पट्टा कानून अथवा बड़े पैमाने पर सार्वजनिक निवेश की जरूरत है जिससे कि इस क्षेत्र की आवश्यक बुनियादी सुविधाआें की व्यवस्था हो सके। उन्होंने कहा कि कारखाना क्षेत्र पर भी ध्यान दिए जाने की अत्यंत जरूरत है। सीआईआई की नई पहलों की जानकारी देते हुए कामथ ने कहा कि निजी क्षेत्र का निवेश दूसरे दर्जे के शहरों में विशेषकर स्वास्थ्य, संगठित खुदरा, पर्यटन और लोजिस्टिक सेवा क्षेत्रों में लाने पर रहेगा।

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