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पटेल से प्रेम की वजह

सरदार पटेल की विरासत पर बीजेपी के दावे के साथ कुछ ऐसे सवाल भी खड़े हो जाते हैं, जिनका जवाब संघ परिवार नहीं देना चाहता। संघ परिवार कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को खत्म करने की मांग लगातार करता है, लेकिन सरदार पटेल ने 15 अगस्त, 1947 को ऐसे भारत के नक्शे को स्वीकार किया था, जिसमें कश्मीर था ही नहीं। जब विवाद बढ़ा, तो पटेल ने शुरुआत में ‘कश्मीर के झंझट से दूर रहने की ही नसीहत दी थी।’ यही नहीं, वह संविधान के अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को दी गई विशेष रियायतों के न सिर्फ समर्थक थे, बल्कि शर्तें तय करने में उनकी अहम भूमिका थी। तो फिर संघ के पटेल प्रेम की वजह क्या है? जानकार मानते हैं कि संघ खुद को सबसे बड़ा राष्ट्रवादी बताता है, लेकिन हकीकत यह है कि स्वतंत्रता संग्राम में उसने भाग नहीं लिया। ऐसे में, उसके पास ऐसे नायक नहीं, जो अंग्रेजी साम्राज्यवाद से टकारते हुए पूरे भारत में सम्मानित हुए हों, जिनके जरिये राष्ट्रीय भावना जगाई जा सके। अब इस कमी को पटेल के जरिये पूरा करने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस कार्यसमिति ने जून 1934 में प्रस्ताव पारित किया था कि कांग्रेस सदस्य, हिंदू महासभा, मुस्लिम लीग और आरएसएस से कोई संबंध नहीं रखेंगे। पटेल ने यह शपथ जीवन भर निभाई, लेकिन उनकी मौत के 63 साल बाद अगर आरएसएस ही उनसे संबंध जोड़ने मे जुटा है, तो पटेल इसे रोकने के लिए क्या कर सकते हैं?
आईबीएन खबर में पंकज श्रीवास्तव

 

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