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भरोसे की चाबी

ताला और चाबी हमारी जिंदगी के इतने महत्वपूर्ण हिस्से हैं कि हम उनके बारे में कभी सोचते भी नहीं, सिवाय तब, जब चाबी खो जाए या ताला धोखा दे जाए। ताला-चाबी सिर्फ उपकरण नहीं हैं, हमारी संस्कृति और भाषा के अंग हैं। इसलिए हम कभी दिमाग के तालों की बात करते हैं, कभी सफलता की चाबी का जिक्र करते हैं। लेकिन क्या अब परंपरागत ताला-चाबी सिर्फ मुहावरों में रह जाएंगे? इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने कई तरह से ताला-चाबी की जगह ले ली है। अब लगभग 80 प्रतिशत कारों में दरवाजे खोलने या इग्निशन स्टार्ट करने के लिए किसी न किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल होता है। कई आधुनिकतम कारों में धातु की चाबी होती ही नहीं। कहा यह जा रहा है कि अगले पांच साल में शायद कोई भी ऐसी कार नहीं बनेगी, जो पूरी तरह धातु की चाबी पर निर्भर होगी। बिना चाबी की कारों की सुरक्षा अब तक एक समस्या है, क्योंकि चोर इलेक्ट्रॉनिक्स और नई सूचना-प्रौद्योगिकी में माहिर होने लगे हैं, और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा के विशेषज्ञ ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित उपकरण बनाने लगे हैं। एक और जगह, जहां से चाबी तेजी से गायब हो रही है, वह है होटल। होटलों में अब चाबी की जगह कार्ड का चलन बढ़ रहा है। कार्ड का इस्तेमाल सुविधाजनक है और साथ ही बिजली की बचत करने वाला भी है, क्योंकि उससे दरवाजा बंद होते ही कमरे में बिजली बंद हो जाती है, जो फिर कार्ड से ही शुरू होती है।

माना जाता है कि चाबी और उससे खुलने-बंद होने वाले ताले का आविष्कार लगभग 4,000 साल पहले मिस्र में हुआ था। उसका बुनियादी सिद्धांत यह था कि चाबी में बने खांचे किसी ताले में बने खांचों में फिट होकर ताले को बंद करने वाली संरचना को गतिशील कर सकते हैं। इसे हम एक ऐसा आविष्कार कह सकते हैं, जिसमें बेहतरी के लिए काफी परिवर्तन हुए हैं, लेकिन उसकी बुनियादी तकनीक 4,000 सालों से तकरीबन वही है। औद्योगिक क्रांति के दौरान ताले में स्प्रिंग, लीवर वगैरह जोड़े गए, लेकिन मूल संरचना में कभी बदलाव नहीं आया। न ही उसकी जरूरत और लोकप्रियता कभी कम हुई। इतिहास में शायद पहली बार ताला-चाबी के अप्रासंगिक होने की बात शुरू हुई है। लेकिन यह बहुत आसानी से नहीं होने वाला। इसकी सबसे बड़ी वजह ताला-चाबी के साथ जुड़ी सुविधाएं हैं। यह तकनीक आसान है, मजबूत और टिकाऊ और बहुत सुरक्षित भी। इलेक्ट्रॉनिक चाबी अगर पानी में गिर जाए या किसी और वजह से खराब हो जाए, तो बड़ी सारी मुश्किलें हो सकती हैं। परंपरागत चाबी आसानी से खराब नहीं होती। गड़बड़ हो भी जाए, तो आम छेनी-हथौड़ी से मुश्किल आसान हो सकती है या बाजार में बैठा चाबी बनाने वाला पांच-दस रुपये में दूसरी चाबी बना दे सकता है। इलेक्ट्रॉनिक व्यवस्था सुविधाजनक भले ही हो, लेकिन इसके बिगड़ने का अर्थ है तमाम मुश्किलें। आग लग जाए या कोई अन्य आपदा आ जाए, तो अक्सर इलेक्ट्रॉनिक ताले जाम हो जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक ताले वाली कारों में यह समस्या देखने में आती है।

इसीलिए घरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से खोलने या बंद करने के सिस्टम उपलब्ध हैं, लेकिन वे लोकप्रिय नहीं हैं। कार और होटल तक तो ठीक है, घरों को सुरक्षित रखने के लिए लोग आज भी पुराने ढंग के ताले-चाबी पर ज्यादा भरोसा करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इलेक्ट्रॉनिक तकनीक चाबी के मुकाबले ज्यादा फायदेमंद, सुविधाजनक या सुरक्षित भी नहीं हैं। हो सकता है कि आने वाले दिनों में स्थिति बदल जाए। और पुराना ताला-चाबी इतिहास की चीज बनकर रह जाए, लेकिन फिलहाल इस 4,000 साल पुरानी तकनीक का स्थायी विकल्प दिख नहीं रहा है।

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