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बेकाबू ट्रक ने टेंपो को रौंदा, सात की मौत

एक टेंपो था। उसमें सवार थे 14 से 20 लोग। सोचिए कैसे हो रहा होगा यह सफर। टेंपो में सवार सभी लोगों के मन में डर था, क्योंकि उनका सफर ही मौत की पीठ पर हो रहा था। जब टेंपो चकभिटारा गांव के पास पहुंचा तो शाहजहांपुर की ओर से आते ट्रक को सबने देखा। पता नहीं क्यों टेंपो में बैठे देशराज का मन घबराया। इसके बाद जो कुछ हुआ, देशराज को पता नहीं, उसकी आंख जिला अस्पताल में खुली।

हाइवे किनारे के खेतों में किसान अपनी फसल काटने में मग्न थे। हाई वे पर यातायात बिल्कुल सामान्य था। तभी करीब पौने बारह बजे अचानक से चक भिटारा गांव के पास किसानों को तेज आवाज सुनाई दी। देखा तो एक टेंपो को ट्रक ने टक्कर मार दी थी और टेंपो पलट कर सड़क से नीचे गिर रहा था। इतना देखना था कि आसपास के करीब बारह-चौदह लोगों के कदम हाइवे की और बढ़ चले। अब रोने, चिल्लाने की आवाज तेज होती जा रही थी, ठीक वैसे ही खेत की ओर से किसानों के कदम भी तेजी से हाइवे की ओर बढ़ रहे थे।

जब किसान हाइवे पर पहुंचे तो टेंपो पलटा हुआ था, उसमें सवार लोग खून से सने हुए थे। कुछ तो होश में थे और कुछ ऐसे थे जिनकी आंखें बंद हो चुकी थीं। ग्रामीणों ने सबसे पहले टेंपो को सीधा किया। उसमें सवार लोगों को सड़क किनारे लिटाया। पुलिस को खबर दी। तब तक किसानों ने घायलों को जो भी मदद हो सकती थी की। करीब बीस मिनट के बाद पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने जैसे ही हालात देखे, सबसे पहले उसने रोड से निकल रहे वाहनों को खाली करा कर हादसे में जख्मी हुए सभी लोगों को जिला अस्पताल भेजना शुरू कर दिया। दस मिनट में ही घटनास्थल से पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल रवाना कर दिया। हालांकि पता था कि सात लोगों की नब्ज नहीं चल रही है, लेकिन पुलिस ने इस उम्मीद में उन लोगों को अस्पताल भेजा कि एक सांस भी बाकी होगी तो डाक्टर बचा लेंगे। ग्रामीणों ने हादसे के बाद ट्रक ड्राइवर राशिद को भागते देख लिया था। उसके पीछे कई ग्रामीण लग गए। वह गांव की ओर भागा, जब सब घायलों को जिला अस्पताल भेज दिया गया, तब ग्रामीणों ने जाकर ट्रक चालक राशिद को पकड़ लिया। उसकी जमकर पिटाई की। बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया।


ऐसे हुआ हादसा
चकभिटारा गांव के पास में जहां पर हादसा हुआ, वहां पर फोन लेन निर्माण के कारण रोड का डायवजर्न है। ट्रक सीतापुर की ओर दाहिने से बाएं और टेंपो शाहजहांपुर की ओर बाएं से दाहिने साइड में पास होने को था, लेकिन कन्फ्यूजन के कारण ट्रक और टेंपो ड्राइवर अपनी साइड की ओर जाने में गलती कर बैठे और हादसा हो गया।

यह हुआ हादसे में
टेंपो को जब ट्रक ने टक्कर मारी तो सबसे पहले टेंपो पलट गया। टेंपो की छत उखड़ गई। विंड स्क्रीन भी टूट गई। एंगिल भी उखड़ गए। टेंपो में बैठी सवारियां दब कर रह गईं। दोनों ही वाहन स्पीड में थे, इसलिए टेंपो में सवार लोगों को सहारा नहीं मिल सका और इसमें सात लोगों की मौत हो गई। किसानों ने टेंपो को सीधा किया और लोगों को निकाला।

ऐसे बैठे थे टेंपो में
टेंपो में लटके थे कि बैठे थे, कुछ भी समझ लीजिए। एक टेंपो, जिसमें तीन सवारियों के बैठने का परमिट होता है, उसमें 14 से बीस लोग कैसे आ सकते हैं। सुनने में जादू लगता है, लेकिन सच है। कैसे बैठे थे इस टेंपो में लोग, बताते हैं। सबसे आगे ड्राइवर ने अपने अगल-बगल दो लोगों को बैठा रखा था। अपनी पीठ के पीछे पतली सी लकड़ी की पटटी पर चार लोगों को बैठाया हुआ था। सामने की बड़ी सीट पर चार लोग बैठे थे, दो के गोद में बच्चाे थे। इसके पीछे बैक में भी चार लोग बैठे थे। बाकी के लोग लटके हुए थे। जिसमें से सात लोग मर गए और बाकी के लोग जख्मी हो गए।


ट्रक चालक पर मुकदमा दर्ज
लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी के गांव कुमरहा निवासी मुनीष गौतम ने रोजा थाने में अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। ट्रक चालक पर गैर इरादतन हत्या की धारा समेत कई आरोप लगाए गए हैं। इस हादसे में मुनीष की रिश्ते की सास सुशीला, सुमित्र और दादी रामबेटी की मौत हुई है।

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