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नई आदतें नया जीवन

जैक कैनफील्ड
अमेरिका के प्रसिद्ध लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर। बेस्टसेलर किताब ‘चिकन सूप फॉर सोल’ शृंखला के सह-लेखक हैं। ‘जीवन में आत्मसम्मान‘ उनका प्रिय विषय है।

अच्छी हो या बुरी, आदतें जीवन पर अपना असर जरूर डालती हैं। ड्यूक यूनिवर्सिटी में हुए शोध को मानें, तो हम अपनी आदतों को ही जी रहे होते हैं। रोजमर्रा के व्यवहार में उन आदतों को ही दोहराते रहते हैं।
कहते हैं कि आदतें बदलती नहीं हैं। पर सच यह है कि लोग उन्हें बदलने का सही तरीका नहीं अपनाते। एक साथ कई आदतों को बदलने की कोशिश में वे अपनी इच्छाशक्ति पर जरूरत से ज्यादा बोझ डाल देते हैं।

हम कुछ नहीं, अपनी आदतों का एक पुंज हैं। जिस तरहसे रोज सुबह हम बिस्तर से उठते हैं, दिन की शुरुआत करते हैं, नहाते हैं, कपड़े पहनते हैं, चलते और बोलते हैं, सोचते और दुनिया से व्यवहार करते हैं, यह सब एक तरह से अपनी आदतों को ही जीना है।

आदतें होती हैं जरूरी
आदतें मस्तिष्क को मुक्त करती हैं, ताकि हम रोजमर्रा के कामों को सहजता से कर सकें। बिल्कुल वैसे ही, जैसे कि एक बार ड्राइविंग सीखने के बाद आपको रोज यह नहीं सोचना पड़ता कि किस तरह आप सुरक्षित कार चलाएंगे या फिर इच्छित जगह तक पहुंचने के लिए कैसे चलकर जाएंगे! एक बार शुरुआत हो जाने के बाद से हमारा व्यवहार, हमारी आदतें जीवन का सहज अंग बन जाती हैं।

पर अफसोस है कि ये आदतें हमें एक ढर्रे में कैद कर देती हैं, जो सफलताओं को सीमित करता है।
आप जीवन में अगले स्तर पर पहुंचने के लिए क्या हासिल करना चाहते हैं? शिक्षा, सेहत, करियर या रिश्ते? कोई भी क्षेत्र क्यों न हो, यह तय है कि बदलाव के लिए आपको अपनी कुछ आदतों को छोड़ना होगा। कुछ नई आदतों को जीवन में जगह देनी होगी।  ध्यान रखें, लोग अचानक ही वह सब नहीं जीने लगते, जिसे वे हासिल करना चाहते हैं। वहां पहुंचने में उनकी आदतों की बड़ी भूमिका होती है।
 
आदतें, जो कर रही हैं लक्ष्यों से दूर 
इनका जवाब पूरी ईमानदारी से दें...
- क्या आप हमेशा अपने कामों को अंतिम समय में निपटा रहे होते हैं?
- क्या आप 24 घंटे के भीतर आने वाली कॉल्स या मेल का जवाब दे देते हैं?
- क्या आप पर्याप्त नींद लेते हैं?
- दूसरों से किए वादों को पूरा करते हैं?
- क्या दिनभर के कामों की योजना बनाते हैं?
- कल्पना करके देखें कि यदि आपकी सभी आदतें उत्पादक हो जाएं

- तो जीवन कैसा होगा? 
- कैसा होता जीवन यदि आप पोषक आहार, नियमित व्यायाम और भरपूर नींद ले रहे होते?
- क्या होता यदि कुछ बचत की होती और खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल की जगह नकद भुगतान कर रहे होते?
- क्या होगा यदि आप कामों को कल पर टालना छोड़ दें। डर से बाहर निकलें और अपने क्षेत्र के लोगों से नेटवर्किंग करें।  
 
क्या आपका जीवन कुछ अलग होता?

मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ऐसा होता। अत: मेरी पहली सलाह है कि आप अपने लिए उत्पादक  साबित होने वाली कुछ आदतों को लिखें, उनके बारे में सोचें और उन्हें अपने जीवन में घटित होते हुए देखें। दूसरी यह है कि खुद को ऐसे प्रस्तुत करना शुरू करें, जैसे आपने अभी से नई आदतों को जीना शुरू कर दिया है।
 
मैं इसे थोड़ा और आगे ले जाना चाहूंगा...
- किसी एक आदत को विकसित होने के लिए तीन माह का समय दें। एक साथ कई आदतों को बदलने की कोशिश करना, अपनी इच्छाशक्ति पर बोझ डालना है। वहीं धीरे-धीरे आप सालभर में चार नई आदतें अपना सकते हैं।
- अपनी नई आदत को एक कार्ड पर लिखकर साथ रखें। उसे दिनभर में कई बार पढ़ें। उसकी कल्पना करें। सहयोगी लोगों की मदद लें। 
- नई आदत के प्रति 100% निष्ठावान रहें। कोई भी कदम पूरी स्पष्टता के साथ उठाएं। तभी उन स्थितियों को भी पहचान सकेंगे, जो नई आदतों को विकसित करने में सहायक होंगी।
इस तरह सालभर में लक्ष्यों तक ले जाने वाली चार नई आदतों को विकसित करना, आपकी जिंदगी को आमूलचूल बदल देगा।
एक बार जैसे ही सफलता मिलनी शुरू होगी, तो दूसरी आदतों को भी बदलना आसान हो जाएगा। और फिर आप देखेंगे कि किस तरह जीवन में सफलता की राहें खुलती हैं।

01 मन: कभी-कभी एकाग्रता की जरूरत होती है, पर मन है कि टिकता नहीं। क्या करें? एक बार खुद को योगी या जेन मास्टर की भूमिका में ले जाएं। अपनी सांसों को देखने लगें। कुछ देर के लिए विचारों का बोझ उतार दें। मानों सूरज की रोशनी से सब बादल छंट गए हों। अब सोचें कि कोई योगी कैसी प्रतिक्रिया देगा? यकीन करें, अच्छा लगेगा। चित्त शांत हो जाएगा।

02 वचन: कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, जब कोई अपनी बात या परेशानी बता रहा होता है? सुनते हैं या सुनने का नाटक करते हैं? या सुनते हुए फोन या कंप्यूटर देखने लगते हैं? ध्यान रखें, ऐसे पलों में आपकी प्रतिक्रिया आपके संबंधों पर असर डालती है। भले ही आप मदद न कर सकें, पर लोगों की बातों में सामान्य रुचि रखते हुए उन्हें अच्छा अहसास जरूर करा सकते हैं। 

03 काया: हर समय अपने रूप और शरीर की आलोचना क्यों? जैसे भी क्यों न दिखें, अपने बारे में अच्छा महसूस करना आना जरूरी है। इसे ही पॉजिटिव बॉडी इमेज कहते हैं। लुक को लेकर अपने हीन भावों को बदलने का तरीका आसान है। यह सोचने के बजाय कि आप कैसे दिखते हैं, यह सोचें कि इस शरीर से आप क्या-क्या करते हैं।

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