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मिसाइल बनाने वाले हाथ करेंगे सुनने में मदद

ब्रहमोस जैसी सुपरसोनिक मिसाइलें बनाने वाले हाथ गढ़ रहे हैं एक ऐसा कोचलियर इम्प्लांट यानी श्रवण यंत्र जो सस्ता और हल्का फुल्का तो होगा ही साथ ही उन बच्चे-बूढ़े और जवानों सभी को आंख मूंद कर लगाया जा सकेगा जो पूरी तरह या गंभीर रूप से बहरेपन का शिकार हो चुके हैं। पूरी तरह से देश में निर्मित ध्वनि तरंगों से संचालित इस कोचलियर इम्प्लांट के विकास का काम अंतिम चरण में है और जल्दी ही जानवरों पर इसका परीक्षण प्रारंभ होने वाला है। कोचलियर इम्प्लांट एक ऐसा इलैक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसका एक भाग सर्जरी द्वारा सिर की खाल के नीचे फिट किया जाता है जबकि दूसरा भाग बाहर रहता है। फिलहाल विश्वभर में उपयोग में लाया जा रहा श्रवण यंत्र खासा मंहगा है और काफी वजनी भी क्योंकि वह 16 इलैक्ट्रॉड सिस्टम पर आधारित है जिसकी कीमत सात से आठ लाख के आसपास है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीआे) के मुख्य नियंत्रक लाइफ साइंसिज डब्ल्यू सिल्वामूर्ति ने बताया कि संगठन के वैज्ञानिक एक ऐसा ‘कोचलियर इम्प्लांट’ विकसित करने में जुटे हैं जिसका वजन ही नहीं इसकी कीमत भी कई गुना कम यानी करीब एक लाख के आसपास होगी। यह श्रवण यंत्र खासतौर पर बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है क्योंकि फिलहाल विश्व में उपलब्ध कोचलियर इम्प्लांट बच्चों को लगाने को लेकर काफी विवाद है। वैज्ञानिकों को आशा है कि पूर्णरूप से भारत में ही निर्मित यह कोचलियर इम्प्लांट इसी वर्ष दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा। पहले जानवरों और फिर मनुष्यों पर इसके परीक्षण किए जाएगे। उसे बाजार में लाने से पूर्व की प्रक्रिया के तहत संगठन को प्रमाणपत्र भी हासिल करना होगा। डॉक्टर सिल्वामूर्ति ने बताया कि मनुष्यों पर इसके परीक्षण छह चरणों में किए जाएंगे। इस उपकरण के दो भाग होंगे। पहले चरण में उपकरण का एक भाग एक व्यक्ित की खोपडी में त्वचा के नीचे फिट किया जाएगा जबकि दूसरा भाग व्यक्ित को अपनी जेब में रखना होगा। दूसरे चरण में इस दूसरे भाग को भी खोपड़ी के भीतर फिट कर दिया जाएगा।

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