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रेलवे के सभी नौ सर्विस काडर होंगे समाप्त

रेलवे के सभी नौ सर्विस काडर होंगे समाप्त

रेलवे यूनियनों के विरोध के बावजूद रेलवे बोर्ड का पुनगर्ठन तय माना जा रहा है। बड़े बदलाव के तहत रेलवे बोर्ड और रेलवे के नौ सर्विस काडर समाप्त किए जा सकते हैं। वहीं, सभी 17 जोनल रेलवे की शक्तियां विक्रेद्रीकृत होंगी।

अर्थशास्त्री बिबेक देबराय की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति अगामी फरवरी माह में रेल मंत्री सदानंद गौड़ा को अपनी सिफारिशें सौंप देगी। रेल बजट में रेलवे बोर्ड के स्थान पर नई संस्था की विधिवत घोषणा हो सकती है।

रेल कर्मचारियों और अधिकारियों की चारों यूनियनों ने अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में रेल भवन में उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति से मुलाकात की थी। यूनियन ने रेलवे बोर्ड के पुर्नगठन और अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी आईएएस को बिठाने का विरोध दर्ज कराया। लेकिन विशेषज्ञ समिति का तर्क है कि यदि रेलवे नहीं बचेगी तो यूनियन क्या करेंगी। इसलिए रेलवे बोर्ड का पुर्नगठन नितांत आवश्यक है। समिति के अध्यक्ष बिबेक देबराय ने ‘हिंदुस्तान’ को बताया कि रेलवे बोर्ड का निगमीकरण किया जाएगा। रेलवे की सिविल इंजीनियरिंग, मकैनिकल इंजीनियरिंग, ट्रैफिक, सिग्नल, अकाउंट आदि नौ सर्विस को समाप्त किया जाएगा। रेलवे में सिर्फ एकीकृत सर्विस (इंडियन रेलवे सर्विस) होगी। जिसमें तकनकी और गैर तकनीकी अधिकारी होंगे।

इस नई व्यवस्था से दूसरे केंद्रीय मंत्रलयों के अधिकारियों का तबादला रेलवे में और रेल अधिकारी को तबादला गैर रेलवे विभागों में संभव होगा। वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर रेल अधिकारी दूसरे मंत्रलयों में तैनात किए जाते हैं। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड काडर को समाप्त कर केंद्रीय सचिवालय सेवा में विलय कर दिया जाएगा। रेलवे ट्रैरिफ आथॉरिटी के बजाए समिति ऐसी आथॉरिटी बनाने पर विचार कर रही है जोकि सिर्फ किराया-भाड़ा नहीं बल्कि सुरक्षा, संरक्षा, यात्री सुविधाएं आदि विषयों पर फैसले कर सके। रेलवे बोर्ड की तर्ज पर जोनल मुख्यालयों की शक्तियां विकेंद्रीयकृत की जाएगी।

देबराय ने कहा कि रेलवे की लेखा प्रणाली (अकाउटिंग सिस्टम) को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना आवश्यक है। विश्व बैंक, जायका, एडीबी आदि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था से कर्ज लेने के लिए अत्यंत आवश्यक है। देबराय ने कहा कि नवंबर माह में समिति सदस्य कोलकाता, मुंबई, वाराणसी आदि स्थिति जोनल मुख्यालयों व फैक्ट्रियों का दौरा करेंगे। इसके पश्चात दिसंबर में पूर्ण रेलवे बोर्ड की बैठक के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। संभवत: अगले साल फरवरी तक समिति अपनी सिफारिशें रेल मंत्री को सौंप देगी।

सैम पित्रोदा की अध्यक्षता वाली रेलवे की विशेषज्ञ समिति ने 2012 में रेलवे बोर्ड के पुर्नगठन करने की सिफारिश की थी। समिति ने स्पष्ट कहा था कि रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के स्थान पर किसी आईएएस अधिकारी को बतौर सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) नियुक्ति किया जाना चाहिए। रेलवे की नीति बनाने और ट्रेन चलाने के कार्य को पृथक किए जाने की जरुरत है।

22 सितंबर को गठित देबराय समिति खन्ना समिति, राकेश मोहन समिति आदि की सिफारिशों का अध्ययन कर चुकी है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों से चर्चा की जा चुकी है। इसमें पूर्व रेलवे बोर्ड अध्यक्ष व सदस्य भी शामिल है। समिति ने रेलवे यूनियनों के पदाधिकारियों से मुलाकात कर उनके सुझाव व आत्तियां दर्ज कर ली हैं।

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