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आंवले के पेड़ की पूजा कर मांगी मन्नत

कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी पर शनिवार को शहर में पूरी आस्था के साथ अक्षय नवमी मनायी गयी। श्रद्धालुओं ने आंवले के पेड़ की दूध, फूल व धूप-दीप से पूजा-अर्चना की और कथा सुनकर आरती की। लोगों ने आंवले के पेड़ पर धागे या कपड़े बांधकर मन्नत मांगी। पेड़ की परिक्रमा कर सुख व समृद्धि की कामना की। पेड़ के नीचे लहसुन-प्याज रहित भोजन बनाया गया। इस भोजन को केले के पत्ते पर रखकर ब्राह्मणों को खिलाकर दक्षिणा दी गयी।

उसके बाद श्रद्धालुओं ने भी भोजन किया। ब्रह्मपुरा की बिन्दु कुमारी व बैरिया की अपराजिता ने कहा कि अक्षय नवमी को आंवले के पेड़ के नीचे भोजन करने और दान-पुण्य करने वाले पर भगवान की असीम कृपा बनी रहती है। चन्द्रलोक चौक की रूपा सिंह, जाह्नवी, राजलक्ष्मी व सौम्या ने कहा कि अक्षय नवमी पर वे हर साल आंवला के पेड़ के नीचे भोजन बनाकर पूजा कर दीये जलाती हैं। ऐसा करना मंगलकारी होता है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु व शिव का निवास होता है। पेड़ के नीचे भोजन करते समय थाली में आंवला का पत्ता गिरे तो वह शुभ होता है।

 

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