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सोलो हीरो फिल्मों की बात करना बकवास है

रिफ्यूजी से हैप्पी न्यू ईयर तक अभिषेक बच्चन का फिल्मी सफर काफी लंबा रहा है। बेशक, उन्हें अपने पिता की तरह कामयाबी नहीं मिली, लेकिन अब वह सिर्फ अभिनेता नहीं हैं। वह फिल्म निर्माता भी हैं और खेलों से भी जुड़े हुए हैं। वह कबड्डी और फुटबॉल टीम के मालिक भी हैं। इसके बावजूद, वह मानते हैं कि अभिनय ही उनका पेशा है। हैप्पी न्यू ईयर की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआती कामयाबी के बाद उनसे बात की शांतिस्वरूप त्रिपाठी ने-

आप कितने प्रतिशत स्पोट्र्समैन और कितने प्रतिशत अभिनेता हैं?
मैं सौ प्रतिशत स्पोट्र्समैन और सौ प्रतिशत अभिनेता हूं।

दोनों सौ प्रतिशत कैसे संभव है?
आज की तारीख में सब कुछ संभव है। हम अपने काम के अनुसार अपना शेड्यूल बदल सकते हैं। जब मैं कबड्डी के मैच में व्यस्त था, उस वक्त मैं फिल्म की शूटिंग नहीं कर रहा था। फिलहाल, हैप्पी न्यू ईयर  का प्रोमोशन खत्म करने के बाद फुटबॉल से जुड़ा हुआ हूं। दिन में 24 घंटे होते हैं। काम करने के लिए बहुत समय होता है। हम दिल लगाकर काम करें, तो सब कुछ हो सकता है।

हैप्पी न्यू ईयर की सफलता से कितने खुश हैं?
सफलता तो खुशी ही देती है। हम सबने जिस कन्विक्शन और मेहनत के साथ काम किया, उससे हमें एहसास था कि दर्शकों को यह फिल्म जरूर पसंद आएगी। इस फिल्म में मेरे लिए नंदू भिड़े का किरदार निभाना बड़ी चुनौती था। निजी जीवन में मैं नंदू भिड़े जैसा बिल्कुल नहीं हूं।

आपने आमिर और शाहरुख, दोनों के साथ काम किया है। इन दोनों को आप किस तरह देखते हैं?
दोनों बहुत ही बेहतरीन कलाकार हैं। दोनों ने महज तकदीर के भरोसे यह मुकाम नहीं पाया है, बल्कि इसके पीछे इनकी कड़ी मेहनत है। दोनों समर्पित भाव से काम करने वाले हैं। दोनों अपने काम को समझते हैं और उसे संजीदगी के साथ अंजाम देते हैं। आमिर हों या शाहरुख या मेरे डैड हों, मेरा मानना है कि जिन्होंने भी सफलता पाई है, उन सबका अप्रोच एक जैसा ही होता है। काम को लेकर उनमें कोई ‘ईगो’ नहीं होता। मैंने इन सभी बडे़ कलाकारों को कुछ सीखने के लिए लालायित देखा है। मेरे पिता 73 वर्ष के हो गए हैं। पर वह आज भी बच्चों की तरह कुछ सीखना चाहते हैं। वह आज भी रात भर अपने संवाद रटते हैं।

जब एक कलाकार खुद निर्माता बनता है, तो फिर उसके अंदर किस तरह के बदलाव आते हैं?
कलाकार के निर्माता बनने के बाद उसमें बदलाव आना चाहिए। पर बदलाव आता नहीं है। फिल्म पा के निर्माण के दौरान मेरे अंदर के कलाकार और निर्माता के बीच जो टकराव होता था, वह बहुत बड़ी समस्या थी। निर्माता के तौर पर हम कम बजट में चीजों को करने की सोचते हैं। कलाकार के तौर पर हम ऐसा नहीं सोचते हैं। ज्यादातर कलाकार निर्माता बनने के बाद सफल नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि वह आर्थिक दृष्टिकोण की बजाय रचनात्मक दृष्टिकोण से सोचते हैं। हर फिल्म का एक बजट होता है और निर्माता को उसी बजट में फिल्म बनानी होती है।

क्या एक निर्माता को क्रिएटिव नहीं होना चाहिए?
निर्माता क्रिएटिव हो ही नहीं सकता। निर्देशक को क्रिएटिव होना चाहिए। निर्माता का काम तो आर्थिक पक्ष को संभालना है। निर्माता को सोचना चाहिए कि इस कहानी का स्कोप यह है और उसी बजट के अंदर फिल्म बननी चाहिए। जब हम पा  बना रहे थे, तब फिल्म के निर्देशक आर बालकी के साथ हमारी काफी बैठकें हुईं। हमें समझ में आया था कि यह फिल्म मल्टीप्लैक्स के लिए हैं। हमने उस फिल्म को 15 से 17 करोड़ के बीच में बनाने की बात सोची। फिल्म ने काफी अच्छा बिजनेस किया। यह बडे़ बजट की होती, तो शायद नुकसान होता। बुड्ढ़ा होगा तेरा बाप हमने साढ़े दस करोड़ में बनाई। उसके सैटेलाइट राइट्स साढ़े 14 करोड़ में बेचे थे। हर कहानी का एक बजट होता है। उसी में फिल्म बननी चाहिए।

आप ‘सोलो’ फिल्मों में नजर नहीं आते?
मैं ‘सोलो’ हीरो वाले कांसेप्ट में यकीन नहीं करता। सोलो हीरो फिल्मों की बात करना ही मूर्खता है। फिल्म गुरु यदि सोलो हीरो वाली फिल्म थी, तो फिर क्या इस फिल्म में ऐश्वर्या, माधवन कुछ थे ही नहीं। इस ढंग की बात करने वाले लोग दूसरे कलाकारों का अपमान करते हैं। मेरा मानना है कि यदि कोई फिल्म हिट होती है, तो उसके लिए मेरे साथ-साथ वह जूनियर आर्टिस्ट भी जिम्मेदार है, जिसने सिर्फ एक पासिंग सीन दिया है। आपके किरदार की लंबाई कोई मायने नहीं रखती।

क्या आप किसी खिलाड़ी की बायोपिक फिल्म बनाना चाहेंगे?
जी नहीं! पर मुझे लगता है कि ध्यानचंद की जिंदगी पर फिल्म बननी चाहिए। ध्यानचंद और शाहरुख खान काफी मिलते-जुलते नजर आते हैं। मेरा मानना है कि शाहरुख खान को ध्यानचंद पर फिल्म बनाने के साथ ही उन्हें खुद ध्यानचंद का किरदार निभाना चाहिए। ध्यानचंद की जिंदगी काफी प्रेरणादायक है। मैंने इस बारे में शाहरुख खान से बात भी की। शाहरुख अच्छे हॉकी खिलाड़ी भी रहे हैं। उन्होंने नेशनल लेवल पर खेला है।

आप अपने पिता के किस रीमेक में अभिनय करना चाहेंगे?
मुझे बख्श दो। वह ओरिजनल हैं। उनकी हर फिल्म के रीमेक में हम काम करना चाहते हैं। लेकिन हम देखते हैं कि उन्होंने जिस तरह की परफॉर्मेंस दी है, उस तरह की परफॉर्मेंस देने की हमारी हिम्मत नहीं होती। इसलिए इस सवाल का जवाब देना काफी मुश्किल है।

 

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