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गोकुल बैराज पर उपद्रवियों का पांच घंटे तक रहा कब्जा

शुक्र है उपद्रवियों के हाथ गोकुल बैराज के बिजली पैनल के हैंडिल तक नहीं पहुंचे। बात तोड़ फोड़ और जनरेटर की आग और बिजली लाइन तक ही रह गई। उपद्रवियों के हाथ और बढ़ जाते तो गोकुल बैराज पर भरा लाखों क्यूसेक पानी निकल पड़ता है। नतीजा मथुरा और आगरा प्यासे रह जाते। हालांकि उपद्रव में बैराज को भारी नुकसान हुआ है और सिस्टम ब्रेक हो गया है। गेट ऑपरेशन में भी दिक्कत आ गई है।

सुबह से ही बड़ी तादात में आसपास के किसान और भाजयुमो कार्यकर्ता गोकुल बैराज पर पहुंच गये थे। जैसे दोपहर हुई तो माहौल गरमा गया। प्रदर्शन गोकुल बैराज पर चल रहा था, सो उपद्रव की शुरूआत भी बैराज से हुई। देखते ही देखते सबसे पहले प्रदर्शनकारियों ने अपना तांडव गोकुल बैराज पर ही दिखाया। प्रदर्शनकारियों ने बैराज के कंट्रोल रूम में तोड़ फोड़ मचाई। रिकार्ड फाड़ दिये। मशीनों को आग के हवाले कर दिया। जनरेटर रूम में आग लगा दी। गनीमत रही कि प्रदर्शनकारियों के हाथ गेट ऑपरेशन सिस्टम के इलेक्ट्रिक हैंडिल तक नहीं पहुंचे।

दरअसल दो तरह से गेट ऑपरेट होता है एक मैन्युअली और दूसरा इलेक्ट्रिक। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है इलेक्ट्रिक सिस्टम। फिलहाल सिस्टम बंद पड़ा है। गनीमत रही के गेट ऑपरेशन प्रभावित नहीं हुआ वरना भरा हुआ लाखों क्यूसेक पानी आगरा के रास्ते बहरकर आगे बढ़ जाता। इससे मथुरा और आगरा की पानी की आपूर्ति प्रभावित होती। घटना के बाद शाम को बैराज के अधिकारियों ने स्थिति का जाजया लिया। आगरा से अधीक्षण अभियंता विनय कुमार राठी बैराज पर आए। उन्होंने निरीक्षण करने के उपरांत अधिशाषी अभियंता को नुकसान का आंकलन करने के निर्देश दिये हैं। अभियंता का कहना है कि काफी नुकसान हुआ है।

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