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मां, पत्नी और बच्चों संग सविधि किया दर्शन-पूजन

देश के अग्रणी उद्योगपति मुकेश अंबानी ने शनिवार शाम मां कोकिला बेन, पत्नी नीता अंबानी और बच्चों के साथ विश्वनाथ मंदिर में सविधि दर्शन पूजन किया। आचार्य देवीप्रसाद द्विवेदी के निर्देशन के पूजन के बाद मुकेश अंबानी ने बाबा के गर्भगृह में श्रद्धा स्वरूप नगद दो लाख रुपए चढ़ाए। इस अवसर में मंदिर परिसर की भव्य सजावट की गई थी। अंबानी परिवार के पहुंचने और मौजूदगी के दौरान लगभग डेढ़ घंटे तक मंदिर में आम दर्शनार्थियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। पूजन के दौरान मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी भी मौजूद रहे।

मुकेश अंबानी का काफिला शाम 6.05 बजे छत्ता द्वार पहुंचा। यहां आचार्य देवी प्रसाद द्विवेदी ने अगवानी की। 6.10 बजे सभी गर्भगृह पहुंचे। अंबानी परिवार के पहुंचने और स्थान ग्रहण करने के बाद 11 ब्रा2ाणों ने मंत्रोचार के साथ पूजन शुरू करवाया। मुकेश और उनकी पत्नी नीता ने रुद्र सूक्त के मंत्र के साथ पूजन का संकल्प लिया। यशस्वी एवं निष्कंटक जीवन की कामना की गई। 101 लीटर दूध से विश्वनाथ का अभिषेक हुआ। 6.35 बजे तक पूजन चला।

 पूजन के बाद आचार्य देवी प्रसाद ने अंबानी दंपत्ति को चांदी के दो  श्रीफल एवं पशमीना शाल भेंट की। इसके बाद चांदी के पात्र में आरती हुई।  6.42 बजे सभी गर्भगृह से बाहर आए और मुख्य कार्यपालक अधिकारी कक्ष के पास पहुंचे। यहां न्यास अध्यक्ष पं. अशोक द्विवेदी और आचार्य देवीप्रसाद ने सभी को अंगवस्त्र, रुद्राक्ष की माला एवं स्मृति चि? प्रदान किया। मुकेश अंबानी ने पूजन कराने वाले सभी ब्रा2ाणों को 11-11 हजार रुपए की दक्षिणा दी। मुख्य आचार्य को दक्षिणा स्वरूप क्या मिला, यह गोपनीय रहा। इस दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी एके अवस्थी, अपर कार्यपालक पीएन द्विवेदी और एसपी-सुरक्षा डीपीएन पाण्डेय भी मौजूद रहे।

अंबानी परिवार के आगमन को देखते हुए शाम 5.30 बजे ही मंदिर परिसर आम दर्शनार्थियों से खाली करा लिया गया था। लगभग 5.45 बजे बम डिस्पोजल स्क्वाड ने मंदिर परिसर की सघन जांच की। वीआईपी भक्तों के पूजन के दौरान बंदरों की धमाचौकड़ी बाधा न डाले, इसके लिए आसपास के मकानों पर लठ्ठधारी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। मंदिर परिसर की सजावट शुक्रवार रात से ही शुरू हो गई थी। सजावट में 5 पेटी गजरा, 1500 गेंदे की माला, रजनी के 1 हजार व गुलाब के 5 हजार फूलों का उपयोग हुआ। इसके अलावा दामिनी और अशोक की पत्तियों से भी सजावट की गई थी।

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