DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ट्रेनों में महिलाएं नहीं हैं सुरक्षित

पिछले कुछ हफ्तों में ट्रेनों में लगातार चोरी, डकैती और दुष्कर्म की घटनाओं से रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे है। हालत यह है कि पांच वर्षो में महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाओं में 200 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई है। जबकि यात्राियों के सामान की चोरी के मामलों में 70 फीसदी और लूट की घटनाओं में 250 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हत्या जैसे जघन्य अपराध रेलवे में हर साल 200 और उससे अधिक होते हैं।


रेल मंत्रलय के यह आंकड़े ट्रेनों में सफर के दौरान आम यात्राियों की सुरक्षा व्यवस्था का खुलासा करते हैं। लेकिन हैरत की बात यह है कि ट्रेनों में अपराध को रोकने के लिए रेलवे की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। रेल मंत्रलय ने चलती ट्रेन में यात्राियों को मौके पर सहायता मुहैया कराने के लिए आरपीएफ का हेल्पलाइन नंबर शुरू करने की घोषणा की थी।

इसके लिए चार करोड़ से अधिक लागत से दिल्ली के दयाबस्ती में कंट्रोल रूम स्थापित होना है। इसमें 250 रेलवे स्टाफ 30 आरपीएफ जवानों के साथ 24 घंटे तैनात रहेंगे। लेकिन पांच साल से इस पर अमल शुरू नहीं किया जा सका है। 2012 में फिर आरपीएफ हेल्पलाइन नंबर 135 की घोषणा हुई। लेकिन अभी यह शुरू नहीं हुआ है। वहीं, चलती ट्रेन में टीटीई और कंटक्टर (ट्रेन अधीक्षक) को फार्म दिया जाता है। जिससे कोई अप्रिय घटना होने पर यात्राी फार्म पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। जिसे अगले स्टेशन पर आरपीएफ-जीआरपी को सौंप दिया जाता है। यह फार्म एफआईआर में स्वत: तब्दील हो जाता है। लेकिन जरुरतमंद यात्राियों को शायद ही यह फार्म उपलब्ध कराया जाता है।

रेल मंत्री सदानंद गौड़ा भी मानते हैं कि रेलवे में अपराध की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। जुलाई माह में राज्यसभा में पूरक प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने ट्रेन में यात्राियों की विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

रेल यात्री अपराधियों के लिए क्यों हैं आसान निशाना
रेल यात्री अपराधियों के लिए सबसे आसान निशाना होते हैं। इसका कारण अंग्रेजों की बनाई हुई सुरक्षा व्यस्था आज भी चल रही है। इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। रेलवे एक्ट के मुताबिक रेलवे संपत्ति की सुरक्षा आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) के कंधों पर है। वहीं, रेल की पटरी, पुल, सुरंग आदि की सुरक्षा का जिम्मा जिला पुसिल के हवाले है। जबकि स्टेशन अथवा चलती ट्रेन में यात्राियों के साथ अपराध होने पर एफआईआर, जांच और गिरफ्तारी का कानूनी अधिकार जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) को होता है। जानकारों का कहना है कि अंग्रेजों के समय रेल चलाने का काम निजी कंपनियां करती थीं। और उनको सुरक्षा प्रदान करने का कार्य राज्य सरकारें करती थी जिसका भुगतान उक्त कंपनियां करती थीं। रेलों का राष्ट्रीयकरण हो गया लेकिन सुरक्षा आज भी राज्यों (राजकीय रेलवे पुलिस) के पास है।

रेल मंत्री सदानंद गौड़ा यात्राियों की सुरक्षा आरपीएफ के हवाले करने के लिए सक्रिय हैं। गौड़ा आरपीएफ को अधिक कानूनी शक्तियां देने वाले आरपीएफ संशोधन विधेयक 2011 को आगामी शीतलाकानी संसद सत्र में पेश करना चाहते हैं। इस विधेयक पर सहमति बनाने के लिए रेल मंत्री ने पिछले हफ्ते सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है।

दरअसल कई राज्य सरकारों ने विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि कानून व्यवस्था राज्यों का विषय है। जबकि नए विधेयक में आरपीएफ को एफआईआर दर्ज करने की शक्ति मिल जाएगी। आरपीएफ को अपराध की घटनाओं की जांच करने, गिरफ्तारी, मुकदमों की पैरवी करने का अधिकार होगा। जबकि वर्तमान में यह काम जीआरपी (राजकीय रेलवे पुलिस) करती है।
---------------
इसके अलावा ट्रेन के प्रत्येक कोच में एक महिला सिपाही की तैनाती की योजना है। अकेले यात्रा करने वाली महिला यात्राियों के लिए आरपीएफ महिला सिपाही मदद करेगी। कोच यात्राियों को आरपीएफ का हेल्पनंबर जारी किए जाएंगे। कोच में चरणबद्ध तरीके से सीसीटीसी कैमरे लगाए जांएगे।
-----------
ट्रेनों-स्टेशनों पर तैनात होंगे अतिरिक्त 17,000 आरपीएफ जवान
रेलवे के अधिकारकी ने बताया कि अगले छह माह बाद ट्रेनों व स्टेशनों पर यात्राियों की सुरक्षा के लिए 17,000 अतिरिक्त आरपीएफ बल तैनात कर दिया जाएगा। इसमें 4000 हजार महिलाएं हैं। रेलवे ने वित्त मंत्रलय से आरपीएफ में अतिरिक्त एक हजार महिलओं की भर्ती की मंजूरी मांगी है। आरपीएफ जवान देश के विभिन्न स्थलों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। छह माह बाद प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी तैनाती शुरू हो जाएगी। जिससे महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
-----------------
कौन से रेलवे रूट हैं अधिक खतरनाक (अप्रैल-अक्तूबर 2012 के आंकड़े)
 2012 में जबलपुर-भोपाल-कोटा (पश्चिम रेलवे) के बीच चलने वाली ट्रेनों में दुष्कर्म होने की चार घटनाएं हुइ्र्र थीं।
अहमदाबाद-भावनगर की रूट की ट्रेनों में दो व हुबली, बंगलुरू-मंगलुरू रूट पर दो घटनाएं सामने आईं हैं। कोलकाता-चक्रधरपुर-खड़गपुर रूट, बिलासपुर-रायपुर-नागपुर रूट, मुंबई-भूसावल रूट, जयपुर-अजमेर-बिकानेर-जोधपुर आदि रूट पर चलती ट्रेनों में महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

हैदाराबाद से पटना के बीच चलती ट्रेन (ट्रेन संख्या-1279) में एक फैशन डिजाइनर छात्र के साथ चार लड़के रातभर छेड़खानी करते रहे।
-----------
2009 से 2013 के दौरान अपराधों पर एक नजर
वर्ष    हत्या    दुष्कर्म    लूट    चोरी
2009    245    27    392    12403
2010    201    25    441    12536
2011    231    21    493    14701
2012    246    47    824    14267
2013    270    54    1096    18037
---------------
रेलवे की स्थिति
ट्रेनों में प्रतिदिन 2.30 करोड़ रेल यात्राियों की सुरक्षा के लिए रेलवे में सिर्फ 68000 हजार आरपीएफ बल है। 2003 में रेल संपत्ति के साथ यात्राियों की सुरक्षा का जिम्मा मिलने के बाद आरपीएफ ने 25000 हजार अतिरिक्त जवानों की भर्ती की मांग की थी। लेकिन केंद्र सरकार ने सिर्फ 5000 हजार जवानों की भर्ती मंजूरी की। मजेदार बात यह है कि नौ साल गुजरने के बाद भी 5000 अतिरिक्त बल की भर्ती पूरी नहीं हो सकी है। आरपीएफ के अधिकारियों ने बताया कि 1350 (1300 जवान व 500 अधिकारी) आरपीएफ बल की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने वाली है। हर रोज 11000 हजार ट्रेनों में रेलवे सिर्फ 3200 चलती ट्रेनों में आरपीएफ-जीआरपी जवानों की गश्त कराती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:ट्रेनों में महिलाएं नहीं हैं सुरक्षित