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जदयू के चार बागी विधायकों की विधायकी खत्म

विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी की कोर्ट ने शनिवार को जदयू के चार बागी विधायकों ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, नीरज कुमार बबलू, राहुल कुमार और रवींद्र राय की विधायकी समाप्त कर दी। उन्होंने इनकी विधायकी खत्म किए जाने के निर्णय को भारत के निर्वाचन आयोग को भेजने का निर्देश दिया। उधर विधानसभा अध्यक्ष की कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले को चारों विधायकों ने गैरसंवैधानिक कहा है। इस फैसले के खिलाफ सभी कोर्ट जाएंगे।

विधानसभा अध्यक्ष की कोर्ट ने इन चारों विधायकों की न सिर्फ विधायकी समाप्त किए जाने का फैसला दिया बल्कि यह भी आदेश दिया कि इन विधायकों को पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी। इन चारों विधायकों की विधायकी समाप्त किए जाने को लेकर संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने इसी वर्ष 21 जून को विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन दिया था। पच्चीस जुलाई को इस प्रकरण में पहली सुनवाई हुई थी। आखिरी सुनवाई 13 सितंबर को हुई थी।

विधायकी समाप्त किए जाने की वजह
संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, नीरज कुमार बबलू, राहुल कुमार और रवींद्र राय की विधायकी समाप्त किए जाने का जो आवेदन दिया था उसमें मुख्य बात यह थी कि राज्य सभा के लिए हुए उपचुनाव में इन विधायकों ने दल के खिलाफ काम किया। दल के खिलाफ न सिर्फ उम्मीदवार को मैदान में उतारा बल्कि उनके लिए वोट जुटाने का काम किया और उनके पोलिंग एजेंट के रूप में भी काम किया। दूसरे विधायकों पर भी दल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी को वोट देने के लिए दबाव बनाया। यह मामला स्वेच्छा से दल त्याग का बनता है।

यह बना आधार
संविधान की 10 वीं अनुसूचि के पैरा 2 (1) (ए) आधार बनाकर की गयी कार्रवाई।
चार अन्य विधायक भी हैं कतार में
शनिवार के फैसले के बाद जदयू के चार अन्य बागी विधायकों की विधायकी भी अब खत्म होना तय माना जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने विधायक पूनम देवी, अजीत कुमार, सुरेश चंचल और राजू सिंह की विधायकी समाप्त किए जाने के खिलाफ भी विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन दिया हुआ है। इनके मामले में भी सुनवाई हो रही है। शनिवार को भी इनकी पेशी विधानसभा अध्यक्ष कोर्ट में हुई। अब 22 नवंबर को इनकी अगली तारीख है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कुछ भी बोलने से परहेज किया
विधानसभा अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी से जब इस फैसले के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें जो कहना था उसे उन्होंने अपने फैसले में कह दिया है। इसके अलावा उन्हें कुछ और नहीं कहना है। जदयू की ओर से वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा पूर्व महाधिवक्ता पीके शाही ने पैरवी की। उन्होंने भी इस फैसले पर भी किसी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया।

 

 

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  • Web Title:जदयू के चार बागी विधायकों की विधायकी खत्म