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नई सरकारं करंगी एटमी करार पर फैसला:अधिकारी

गतिरोध का शिकार बने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु करार पर अंतिम फैसला अब दोनों देशों की अगली सरकारं ही कर पाएंगी। अमेरिका के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति भी संभवत: परमाणु पहल में कोई रोड़ा नहीं अटकाएंगे। अधिकारी ने यह भी कहा कि परमाणु करार को भारत के ईरान के साथ संबंधों में शर्त नहीं बनाया जाना चाहिए। यह पूछने पर कि क्या अमेरिका के आगामी राष्ट्रपति इस करार में कोई रोड़ा भी अटका सकते हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में एशिया मामलों के प्रभारी रहे अमेरिका के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ब्रुस रायडल ने कहा, ‘मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा।’ रायडल ने कहा, ‘देर- सबेर भारत में भी कांग्रेस और कम्युनिस्टों का साथ खत्म हो जाएगा। संभवत: उनके बीच का गठाोड़ मई 200तक आगामी लोकसभा चुनावों के नजदीक आने पर खत्म होगा। इसलिए यह करार भारत की भी अगली सरकार के मत्थे ही आएगा।’ संभावना है कि अमेरिका का नया प्रशासन भी करार के अप्रसार वाले पक्षों को लेकर संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश करगा। अगर डेमोक्रेट चुनाव जीत जाते हैं तो वे व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) को पुनर्जीवित करने की कोशिश करंगे।

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