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सिफारिश और संस्तुति में खोकर रह गई खुदकुशी की जांच

क्या मथुरा में सुसाइड करने वाले संकल्प आनंद के माता-पिता को न्याय मिलेगा? क्या उसकी खुदकुशी की वजहों की सच्चई कभी सामने आ पाएगी ? यह सवाल राज्य सरकार, डीजीपी और मथुरा पुलिस के रवैये को देखते हुए उठ रहे हैं।

मशहूर संगीतकार संतोष आनंद के बेटे संकल्प आनंद ने परिवार के साथ 15 अक्तूबर को मथुरा में खुदकुशी कर ली थी। संकल्प आनंद और उनकी पत्नी की तो मौत हो गई लेकिन छह वर्षीय मासूम बेटी की जान बच गई थी। संकल्प ने खुदकुशी से पहले अपने सुसाइड नोट को अपना मृत्यु पूर्व बयान करार दिया। संकल्प ने सुसाइड नोट में लिखा कि ‘नेशनल इंस्टीट्यूट आफ क्रिमिनोलाजी एंड फारेंसिक साइंसेज़’ के निदेशक रहे डीजी कमलेंद्र प्रसाद, डीआईजी संदीप मित्तल समेत करीब एक दजर्न लोग उसकी मौत के जिम्मेदार हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार कर उसे फंसाया और वह खुदकुशी को मजबूर हुआ।
हैरत यह कि पूरे मामले में मथुरा एसएसपी ने यह कहकर पीछा छुड़वा लिया कि मामला कई राज्यों से जुड़ा है। लिहाजा सीबीआई जांच करे। उन्होंने डीजीपी मुख्यालय को पत्र लिखने की बात कही। पुलिस महकमे की खतो-किताबत का क्या कहें? मथुरा से चला पत्र एक सप्ताह बाद लखनऊ पहुंचा। फिर, डीजीपी मुख्यालय ने सीबीआई संस्तुति के लिए शासन को पत्र लिखने की कवायद शुरू करने का दावा किया। अंतत: न जाने क्या हुआ कि चार दिन बाद भी सीबीआई जांच पर कोई फैसला नहीं हो सका?
इनसेट :-
आखिर कौन है सीबीआई जांच में रोड़ा?
पुलिस महकमे में चर्चा आम है कि शासन स्तर पर बैठे दो बड़े अधिकारी सीबीआई जांच में अड़ंगा लगा रहे हैं। आखिर इसकी क्या वजह है? इस पर कुछ भी साफ नहीं हो पा रहा है। इस मुद्दे पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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