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एक्टिंग देखो, मोटापा नहीं

एक्टिंग देखो, मोटापा नहीं

कुछ भी और कहने से पहले 1986 में आयी फिरोज खान की फिल्म ‘जांबाज’ का एक सीन याद आ रहा है। सीन में पिता (अमरीश पुरी) और बेटे (अनिल कपूर) की गुफ्तगू चल रही है। पिता अपने जमाने की लड़कियों को याद करते हुए कह रहा है- ‘बेटा लड़कियां तो हमारे जमाने में होती थीं, जो फल भी देती थीं और फूल भी।’

पिता का इशारा अपने जमाने की लड़कियों की ओर था, जो शरीर से हृष्ट-पुष्ट, चुस्त-तंदुरुस्त हुआ करती थीं। इसमें उस बेटे के दौर की लड़कियों पर कटाक्ष भी था, जो अपना सारा समय बस खुद को सजाने-संवारने और दुबला रखने में बिताया करती थीं। ढाई दशक से ज्यादा पुरानी इस फिल्म से लेकर अब तक फिल्म इंडस्ट्री तो पूरी तरह से बदल गयी है, लेकिन हीरोइनों के मोटापे या बढ़ते वजन पर उंगलियां उठनी बंद नहीं हुई हैं।

ताजा केस अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और परिणीति चोपड़ा का है। दोनों आज जिस सफलता की पायदान पर हैं, उसे नए सिरे से बयां करने की जरूरत नहीं है, लेकिन आये दिन इन दोनों अभिनेत्रियों को अपने वजन के बारे में सफाई देनी पड़ती है। वैसे इस लिस्ट में अभिनेत्री हुमा कुरैशी भी हैं और अभिनेत्री विद्या बालन को तो अपने बढ़ते वजन की वजह से न जाने क्या-क्या सुनना पड़ा है। पहले देखते हैं कि परिणीति चोपड़ा इस बारे में क्या कहती हैं।

खाती हूं, पीती हूं, मस्त रहती हूं...
आपकी पिछली फिल्म के दौरान तो आपका वजन काफी बढ़ गया होगा? इस पर परिणीति ने कहा- ‘तो क्या हुआ! खाती हूं, पीती हूं और मस्त रहती हूं। भूखे रह कर, खुद को मार-मार कर मैं अपना वजन कम नहीं कर सकती। ये मुझसे न हुआ है और न आगे होगा। भई अपन तो जैसे हैं, वैसे ही रहेंगे।’

परिणीति के अंदाज में ये बिंदासपन ऐसे ही नहीं आया।
दरअसल ‘लेडीज वर्सेज रिक्की बहल’ से ही उन्हें अपने बढ़ते वजन को लेकर यशराज बैनर से हिदायतें मिलनी शुरू हो गई थीं। बाद में भी उनकी फिल्मों के निर्देशक उन्हें समय-समय पर चेताते रहे। पर परिणीति की लाख कोशिशों के बावजूद उनका वजन उस तरह से नियंत्रित न हो सका, जैसा कि उनके साथ की अभिनेत्रियों का था। पर इस बीच अच्छी बात यह हुई कि उनके इस बढ़ते वजन की वजह से उनकी फिल्मों को कोई नुकसान नहीं हुआ।

कोशिश जारी है
पिछले दिनों परिणीति एक कार्यक्रम में आयी थीं, जिसमें उन्होंने एक स्लीवलेस शॉर्ट ड्रेस पहनी थी। इस ड्रेस में उन्हें देख कोई भी उन्हें मोटी या गोलू-मोलू एक्ट्रेस ही कहता। पर परिणीति आगे कहती हैं, ‘देखिए, अपने फेवरिट खान-पान को देख कर मुझसे बिलकुल भी रहा नहीं जाता। पर आपको यह तो मानना ही पड़ेगा कि मैं कोशिश कर रही हूं। लेकिन इसे मीडिया राष्ट्रीय मुद्दा क्यों बना रहा है?’ गौरतलब है कि पिछले दिनों जब मीडिया ने सोनाक्षी सिन्हा के बढ़ते वजन पर कमेन्ट्स करने शुरू किये थे तो परिणीति उनके बचाव में आ गई थीं।

वजन से डर नहीं लगता साहब
साल 2010 में जब फिल्म ‘दबंग’ से सोनाक्षी सिन्हा की फिल्मों में एंट्री हुई तो लगा कि बॉस बरसों बाद कोई एक्ट्रेस आयी है, जिस पर कपड़े फिट नजर आते हैं। जो सलवार-सूट और साड़ी में जमती है। जिसकी फिगर पुरानी हीरोइनों की याद दिलाती है। जो हट्टे-कट्टे हीरो के साथ जमती है। इसके बाद ‘राउडी राठौड़, ‘जोकर’, ‘सन ऑफ सरदार’, ‘दबंग 2’, ‘लुटेरा’ जैसी फिल्मों से उनका स्टारडम और मजबूत हुआ। सब जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले सोनाक्षी सिन्हा ने अपने मोटापे के साथ एक मुश्किल जंग लड़ी थी। वैसे तो स्टार किड्स के लिए वजन बढ़ाना और घटाना कोई मुश्किल काम नहीं होता। उनकी इस प्रक्रिया के पीछे पूरी टीम काम करती है। पर सोनाक्षी ने सलमान के कहने पर न केवल अपना वजन कम किया, बल्कि खुद को साबित भी किया। पर मीडिया हमेशा सोनाक्षी के वजन के पीछे पड़ा रहा।

पिछले साल फिल्म ‘लुटेरा’ के दौरान सोनाक्षी से मुलाकात हुई थी। लाइट लेमन रंग के सलवार-सूट में वो एक एक्ट्रेस न लग कर बेहद शालीन सी लड़की लग रही थीं। अमूमन अपनी नई फिल्म के प्रचार के वक्त तारिकाएं बड़े नानी मम्मी संग चाचा या मामा के घर के लिए निकली हैं। सोनाक्षी का ये सादा और सहज अंदाज ही उनकी पहचान बन गया है, जिसके बीच में उनका वजन कहां से आ गया! 

अब क्या हड्डी हो जाऊं...
पिछले दिनों जब मीडिया में फिर से सोनाक्षी सिन्हा के वजन के बारे में बातें उठीं तो उन्होंने इन्स्टाग्राम पर एक फोटो पोस्ट की, जिसमें एक कंकाल नजर आ रहा था। इस फोटो के जरिये सोनाक्षी यही कहना चाह रही थीं कि क्या अब मैं इस कंकाल की तरह हो जाऊं? देखा जाए तो बढ़ते वजन वाली बात पर मीडिया ने परिणीति से ज्यादा सोनाक्षी को परेशान किया है, लेकिन उन्होंने हर बार केवल अपनी बात रखी है। कभी तैश में आकर कोई सनसनीखेज बयान नहीं दिया। लेकिन इस बार जब बातें उठीं तो उनसे रहा नहीं गया।

इन पर तो कभी नहीं उठी कोई उंगली...
आजकल के नौजवान अगर किसी पुरानी फिल्म में अभिनेत्री वैजयंतीमाला को देखेंगे तो कहेंगे कि देखो उस जमाने में कैसी मोटी हीरोइनें हुआ करती थीं।
पर ये भी सच है कि वैजयंतीमाला या उस जमाने की ज्यादातर अभिनेत्रियां डील-डौल के हिसाब से ऐसी ही हुआ करती थीं। तब न तो साइज जीरो का बोलबाला था, न ही मॉडल कट फिगर बनाने का जुनून। उस जमाने में ऐसी फिगर वाली हीरोइनें एक तरह से आदर्श मानी जाती थीं।
पर आज इसी तरह के वजन वाली अभिनेत्रियों को निशाना बनाया जाता है। सोनाक्षी सिन्हा के बहुतेरे फैन्स उनकी तुलना सत्तर-अस्सी के दशक की नायिका रीना राय से करते हैं। न केवल नैन-नक्श के हिसाब से, बल्कि फिगर के लिहाज से भी सोनाक्षी रीना राय की कार्बन कॉपी लगती हैं। जानकार बताते हैं कि उस दौर में कभी रीना राय के वजन को लेकर किसी ने टिप्पणी नहीं की।

कुछ और एक्ट्रेसेज की बात करें तो हेमा मालिनी मोटी न सही, लेकिन गोलू-मोलू एक्ट्रेस के रूप में जानी जाती थीं। उन पर उनका वजन फबता था। या ये कहिये कि वह उसे अपने व्यक्तित्व के अनुसार ठीक ढंग से कैरी कर लेती थीं। यही हाल विद्या सिन्हा, मौसमी चटर्जी, मुमताज, माला सिन्हा, गीता बाली सहित तमाम अभिनेत्रियों का रहा।

लेकिन उन तमाम तारिकाओं के बढ़ते वजन पर इस तरह से शायद ही कभी मीडिया ने हमला किया हो। कई बार लगता है कि इस तरह की बातें केवल खुद का नाम चमकाने के लिए उछाली जाती हैं।

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