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मंगल पर 68 दिन ही जिंदा रह पाएंगे

मंगल पर 68 दिन ही जिंदा रह पाएंगे

मंगल पर आशियाना बसाने का सपना देखने वाले संभल जाएं। धरती से जिस लाल ग्रह का सफर तय करने में आपको सात महीने तक का समय लगेगा, वहां 68 दिन भी जिंदा रहना मुश्किल होगा।
 
टोरंटो में हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय खगोलशास्त्र सम्मेलन में मैसाच्युसेट्स इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने यह जानकारी दी। मालूम हो कि नीदरलैंड की एक निजी कंपनी ‘मार्स वन’ मंगल पर पहली मानव कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रही है। 2024 में वह चार यात्रियों का पहला जत्था रवाना करेगी। इसके बाद हर दो साल पर चार-चार और यात्री लाल ग्रह रवाना किए जाएंगे। इन सभी यात्रियों को ताउम्र वहां पर रहना होगा।

हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि मंगल पर बाशिंदों के भरण-पोषण के लिए बड़े पैमाने पर फसलें उगानी पड़ेंगी। इससे वहां ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी, जो 68 दिन बाद जानलेवा स्तर पर पहुंच जाएगी। शोधकर्ता सिडनी डू की मानें तो लाल ग्रह पर बाशिंदों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी काफी मुश्किल होगा। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पेयजल मुहैया कराने के लिए ‘वॉटर स्कैवेंजिंग’ मशीन का इस्तेमाल होता है। यह मशीन अंतरिक्ष यात्रियों के मूत्र को फिल्टर करके स्वच्छ पेयजल में तब्दील करती है। पर चूंकि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी के चलते यात्रियों की हड्डियों में क्षरण होता है, इसलिए मूत्र में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कैल्शियम ‘वॉटर स्कैवेंजिंग’ मशीन को जाम कर देता है।

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