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दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी में भी काला धन

दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी में भी काला धन

दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार (रियल एस्टेट कारोबार) में 40 फीसदी काला धन लगा है। कारोबारियों और राजनेताओं के जरिये ये धन निवेश के तौर पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि अधिकतर धन चुनावी दिनों में प्रचार के रास्ते रियल एस्टेट में लाया जाता है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने इंटरनेशन नार्कोटिक्स कंट्रोल स्ट्रेटजी की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है।

भारतीय मूल के अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक देवेश कपूर और मिलन वैष्णव ने यह रिपोर्ट तैयारी की। इसमें चुनाव, काला धन और रियल एस्टेट कारोबार पर अध्ययन किया गया। उन्होंने हाल के वर्षो में भारत में हुए चुनाव पर शोध किया।

रिपोर्ट में पाया कि न सिर्फ विदेश बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से हवाला जैसे माध्यमों के जरिये काला धन प्रचार में लाया जाता है। राजनेताओं का इसमें सबसे बड़ा हाथ होता है। प्रचार में लाया जाने वाले पैसों का अधिकतर भाग रियल एस्टेट में निवेश किया जाता है।

बता दें कि पूर्व वित्त मंत्री और मौजूद राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी भी वित्त मंत्री रहते स्वीकार कर चुके हैं कि भारत के रियल एस्टेट कारोबार में काला धन खपाया जाता है। उधर, डीएलएफ कंपनी प्रवक्ता संजय राय इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि हम परियोजनाओं में निवेश के लिए निवेशकों से लेन-देन सिर्फ चेक के माध्यम से करते हैं। नकद राशि नहीं ली जाती। वह कहते हैं कि इससे काला धन आने का सवाल ही नहीं खड़ा होता है।

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