DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

तीन साल मं 16 हचाार छात्रों ने की आत्महत्या

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 16 हाार से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्या की है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की अनुसार 2006 में 5 ,857 और 2005 में 5,138 छात्रों ने आत्महत्या की थी जबकि 2004 में यह संख्या 5,610 थी।ड्ढr ड्ढr स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास ने आईएएनएस को बताया कि हम इस स्थिति की गंभीरता को समझ रह हैं और अब हम नए सिर से रणनीति तैयार करने जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लुएचओ) और चिकित्सकों का मानना है कि छात्रों की चिंता, अवसाद और तनावों को समय रहते रोकने क लिए महत्वपूर्ण रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है, जिससे कि वे आत्महत्या करने का प्रयास न करंे। भारत में डब्लुएचओ की विशेषज्ञ चरियन वर्गीस ने आईएएनएस को बताया कि छात्रों की मानसिक स्थिति की जांच करने की जरूरत है। यहां के स्कूल अच्छी शिक्षा दे रहे हैं लेकिन उन्हें बच्चों को जीवन के प्रति सकारात्मक रवैया भी अपनाने की शिक्षा देनी चाहिए।ड्ढr ड्ढr छात्रों की मानसिक स्थिति को समग्र रूप से देखने की आवश्यकता है और इसक लिए स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में भी बढ़ोतरी करनी चाहिए। उन्होंन कहा कि छात्र अतिसंवदनशील होते हैं। छात्रों की उम्र, स्कूलों व कालजों की प्रतिस्पर्धाएं और पारिवारिक स्थितियां उन्हंे आत्महत्या के लिए प्ररित करती हैं।ड्ढr ड्ढr मनोचिकित्सक नीमश देसाई ने कहा कि इस समय देश में लगभग 3,500 मनोचिकित्सक हैं जबकि इनकी जरूरत इससे दस गुना ज्यादा है।’’ उन्होंने कहा कि आज हर समय छात्रों को किसी न किसी समस्या का सामना करना पड़ता है। चाहे वह कक्षा हो, परिवार हो या समाज हर जगह उसे खुद को साबित करना पड़ता है। यही वजह है कि उसमें चिंता और अवसाद जसी समस्या पैदा हो जाती हैं और एसमें उसे किसी मनोचिकित्सक की सलाह लेनी आवश्यक होती है जिसकी वह लगातार अनदेखी करता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: तीन साल मं 16 हचाार छात्रों ने की आत्महत्या