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राज्य में हाथियों की संख्या घटी

देश का पहला एलिफेंट रिार्व स्टेट झारखंड को बनाया गया था। भारत सरकार ने वर्ष 2001 में सिंहभूम जिले को एलिफेंट रिार्व के रूप में अधिसूचित किया था। हाथियों के संरक्षण और उनके रहने के लिए प्राकृतिक माहौल तैयार करने के उद्देश्य से 13 हाार 440 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को रिार्व किया गया था। प्रोजेक्ट एलिफेंट झारखंड के तहत बनाये गये रिार्व के लिए केंद्र सरकार ने पहले चरण में 80 लाख रुपये का आवंटन किया था। इस पैसे का उपयोग हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाने, इको-डेवलपमेंट करने, हाथियों की सुरक्षा के लिए उपाय करने, वनकर्मियों को प्रशिक्षित करने तथा हाथियों से हुए जानमाल के नुकसान की भरपाई के लिए दिया गया।ड्ढr देशभर में 18 राज्यों में हाथियों के लिए कॉरिडोर बनाया जाना था। इनमें झारखंड और उड़ीसा के बीच एक कॉरिडोर बनाने की योजना के लिए केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार को धन भी मुहैया कराया था। वर्ष 2003-04 में लाख राज्य सरकार को दिये गये। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अकेले पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम के 42 सौ वनभूमि क्षेत्रफल में हाथियों की संख्या 544 थी । रांची और गुमला में 11, पलामू में 155, हाारीबाग और चतरा में 42, दुमका और संथाल परगना में 16 हाथी की संख्या रिकॉर्ड की गयी थी। वर्ष 2005 में राज्य में हाथियों की संख्या 768 हो गयी ।ड्ढr गत वर्ष हुई पशुगणना में हाथियों की संख्या घटकर 622 हो गयी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाथियों का पलायन पश्चिम बंगाल और उड़ीसा समेत अन्य राज्यों में होता है, इस कारण आंकड़ा कम हो गया।

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