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जमीन का धंधा

ामीन के धंधे से जुड़ी गलियों में कितना घुप अंधेरा है, इसका अंदाजा डॉन रोमेश शर्मा की ताजा डील से लगाया जा सकता है। खबरों के अनुसार हत्या जसे संगीन अपराध में जेल काट रहे ‘पंडितजी’ तिहाड़ की चारदीवारी के भीतर रहकर अरबों रुपए की डील कर रहे हैं। कभी दाऊद इब्राहीम का दायां हाथ माने जाने वाले डॉन की करतूतों पर अंकुश लगाने में पुलिस और प्रशासन विफल हैं। प्रापर्टी बाजार पर अपराधियों की पकड़ का यह एक छोटा सा प्रमाण है। पिछले एक दशक में यह धंधा दिल दहला देने वाली ऊं चाई पर पहुंच चुका है। इसके सामने शेष सभी कारोबार खोटे लगते हैं। मोटी कमाई के इस कारोबार में नेताओं, अफसरोंे और अपराधियों का एक नया ठोस समीकरण बना है। कभी सड़कों पर घूमने वाले सैकड़ों छुटौये प्रापर्टी डीलर व बिल्डर बन गए हैं। इस धंधे में लिप्त थोड़े से नाम सामने आते हैं, ज्यादातर पर्दे के पीछे रह जाते हैं। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव रहे अखंड प्रताप सिंह की अकूत जायदाद जानकर देश का दिमाग चकराया था। महानायक अमिताभ बच्चन किसान बनने को तैयार दिखते हैं। असरदार नेताओं की गिनती गिनाना तो व्यर्थ ही है। हमार यहां जनसंख्या की जरूरत के हिसाब से न तो कभी मकानों का निर्माण हुआ है और न ही नगरों-महानगरों की योजना बनी। नतीजा सामने है,-आज देश की लगभग आधी आबादी झुग्गी-झोपड़ियों और अवैध बस्तियों में रहने को मजबूर है और विकास की आंधी से उपजे मध्य वर्ग की जरूरतों को पूरा करने के नाम पर प्रापर्टी डीलरों व बिल्डरों का गठाोड़ बन गया है, जो जमकर कमाई कर रहा है। शासन के गलियारों में इस वर्ग का इतना असर है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री मंच से बिल्डरों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित करने की वकालत कर रहे हैं। अगले चालीस बरस में देश की आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी। इस कठिन चुनौती का सामना करने की हमारी तैयारी कमजोर है। मौजूदा बिल्डरों और प्रॉपर्टी डीलरों की वर्तमान फौा के बूते इस चुनौती से पार पाना असंभव है। पैसा बनाने के फेर में रहने वाले लोगों की राष्ट्र निर्माण में क्या रुचि होगी।

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