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बसपा बन सकती है कांग्रेस के लिए खतरा

र्नाटक में कथित चुनावी सव्रेक्षण के पसंदीदा नतीजे से कांग्रेस के हौसले चाहे जितना बुलंद हों, बहुान समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कई इलाकों में उसके पसीने छुड़ा रहे हैं। वे भले ही स्वयं चुनाव जीतने की हैसियत में न हों लेकिन कई इलाकों में वे कांग्रेस का रास्ता आसानी से रोक सकते हैं। संभव है, इस समीकरण से कई सीटों पर भाजपा या जद(एस)को फायदा मिले। बसपा सूबे में कुल 150 सीटों पर पूर दमखम के साथ लड़ रही है। इस बार उसके साथ कई मंजे हुए नेता हैं। एसे नेताओं में राज्य के पूर्व मंत्री पी.जी.आर. सिंधिया खास तौर पर उल्लेखनीय हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने महासचिव और सांसद वीर िंसह को कर्नाटक का प्रभारी बनाकर बेंगलूर में बैठा दिया है। सिंधिया और वीर की जोड़ी पूर सूबे में घूमकर बसपा की बीस पृष्ठों की अपील के आधार पर लोगों से वोट मांग रही है। इस अपील की दस लाख कापियां छप रही हैं। शुरू में लगा था कि कांग्रेस कर्नाटक की कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल करगी। लेकिन उसने सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री और कर्नाटक में समाजवादी पार्टी के सव्रेसर्वा एस. बंगरप्पा की सीट ही सपा के लिए छोड़ी। दिलचस्प बात है कि जनता दल(एस)ने भी बंगरप्पा के खिलाफ प्रत्याशी न देने का एलान किया है। इस तरह शिमोगा की शिकारीपुरा सीट पर अब भाजपा के शीर्ष नेता और पूर्व मुख्यमंत्री येदुरप्पा और सपा के बंगरप्पा के बीच सीधा मुकाबला है। जिस तरह सपा ने भाजपा नेता येदुरप्पा क ो उनके अपने क्षेत्र में घेरने की भरपूर कोशिश की है, ठीक उसी तरह कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री और जद(एस) नेता एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ ममता निचानी को मैदान में उतारा है। ममता सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत रामकृष्ण हेगड़े की बेटी हैं।

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