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बिजली आपूर्ति में बोर्ड को भी आ रहा पसीना

बढ़ती गरमी में सूबे के लोगों को बिजली मुहैया कराने में बिजली बोर्ड के पसीने छूट रहे हैं। कम उपलब्धता के बावजूद हर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की जद्दोजहद में ‘अंधेरा’ भारी पड़ रहा है। राजधानी पटना को छोड़कर किसी भी जिले को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है। अलबत्ता कहलगांव को भी 24 घंटे बिजली उपलब्ध है। पटना में भी कई क्षेत्रों में दो से छह घंटे तक की लोड शेडिंग हो रही है।ड्ढr ड्ढr राज्य के आधे से अधिक जिले ऐसे हैं जहां दस घंटे भी बिजली मयस्सर नहीं हो रहे। हालांकि एक दर्जन जिलों में मांग के अनुरूप आधी ही सही 15 घंटे बिजली के दर्शन हो रहे हैं। आधे दर्जन जिलों में 20 घंटे लगातार बिजली भी दी जा रही है, हालांकि वह अधिकतम मांग की तुलना में आधी से भी कम है। बिहार की जरूरत इस समय पीक आवर में 2000 मेगावाट से अधिक की हो चुकी है, जबकि उपलब्धता अधिकतम 00 मेगावाट की ही है। इसमें से 300 मेगावाट नेपाल, रलवे, रक्षा कार्यालयों समेत आवश्यक सेवाओं को देने की मजबूरी है। शेष बचे 600 मेगावाट में पूर राज्य का काम चलाना है। राजधानी पटना को न्यूनतम 300 मेगावाट बिजली की जरूरत है। ऐसे में शेष बिहार के लिए मात्र 300 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रह जाती है। इसमें 37 जिलों का काम कैसे चलेगा, सहज कल्पना की जा सकती है।ड्ढr बिहार में 57 फीडरों से 38 जिलों को बिजली आपूर्ति होती है। नौगछिया, जयनगर, लखीसराय, जमुई, डेहरी और मोहनिया में घंटे से भी कम बिजली उपलब्ध है। इसी तरह बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा, मधेपुरा, उदाकिशुनगंज, सीतामढ़ी, रामनगर, वैशाली, सीवान, बांका, जमालपुर, शेखपुरा, नवादा, डुमरांव (बक्सर समेत) और आरा को अधिकतम 12 घंटे बिजली मिल रही है। किशनगंज, अररिया, फारबिसगंज,समस्तीपुर, छपरा, गोपालगंज, बाढ़, फतुहा, रफीगंज, जहानाबाद, बोधगया, विक्रमगंज और सासाराम में 15 घंटों तक बिजली आपूर्ति का दावा बिजली बोर्ड का है। सुपौल, मुजफ्फरपुर, बेतिया, हाजीपुर, बिहारशरीफ और गया को 22 घंटे तक बिजली उपलब्ध है। उधर सबौर और राजगीर ग्रिड को भी 24 घंटे बिजली दी जा रही है।

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