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सुनीता-लाली प्रकरण में जांच का निर्णय

कांग्रस ने अपनी विधायक श्रीमती सुनीता देवी और उनके बॉडीगार्ड बाल योगेश्वर शर्मा उर्फ लाली प्रकरण मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी जांच कराने का निर्णय किया है। जांच के लिए राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर दो कमेटी का गठन किया गया है। पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव एवं महिला कांग्रस की प्रभारी श्रीमती मोहसिना किदवई ने राष्ट्रीय स्तर पर जांच कमेटी गठित की है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष सदानन्द सिंह ने राज्य स्तर की तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनायी है।ड्ढr श्रीमती किदवई ने महिला कांग्रस की पूर्व राष्ट्रीय महासचिव महजबीन खान एवं पूर्व राष्ट्रीय सचिव शिखा कपूर की दो सदस्यीय जांच कमेटी बनायी है। ये दोनो सदस्य 5 मई को पटना पहुंचेंगी और विधायक एवं संबंधित दूसर पक्ष से मिलकर पूर मामले की गंभीरता से परख करंगी। इन सदस्यों के सुनीता देवी के विधानसभा क्षेत्र कोढ़ा जाने की भी संभावना है।ड्ढr ड्ढr वहीं पूर्व विधायक नरद्र कुमार की अध्यक्षता वाली राज्यस्तरीय जांच कमेटी भी 5 मई को ही सदाकत आश्रम में विधायक सुनीता देवी से उनका पक्ष जानेगी। प्रदेश प्रवक्ता एचके वर्मा ने कहा कि समिति के दो अन्य सदस्य वे और जमाल अहमद भल्लू हैं। उन्होंने बताया कि सुनीता देवी के साथ ही लाली से भी मिलने का प्रयास किया जाएगा ताकि दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके। सुनीता देवी के अब तक के बयान से पार्टी सहमत है कि लाली पैसे के लिए उनको ब्लैकमेल कर रहा है। इसलिए सिर्फ मनगढ़ंत आरोप पर वर्तमान में सुनीता देवी पर कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं है।ड्ढr श्री वर्मा ने कहा कि समाचार पत्रों में छपे और इलेट्रोनिक मीडिया में दिखाये गये सभी तथ्यों पर गंभीरता से विचार होगा। लाली द्वारा दर्ज प्राथमिकी का भी अध्ययन किया जाएगा। सभी नेशनल हाइवे पर निजी बसेंड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राज्य के सभी राष्ट्रीयकृत राजमार्गो पर चलेंगी निजी बसें। फिलहाल 50 ऐसे मार्गो पर सिर्फ राज्य पथ परिवहन निगम की ही बसें चलती हैं जबकि यहां निजी बसों को मात्र 40 किलोमीटर तक चलने के लिए ही परमिट दिया जाता है। अब इन पर निगम की बसों के समान ही निजी बसें भी बेधड़क दौड़ेंगी। परिवहन विभाग ने इस संबंध में अपनी तैयारी शुरू कर दी है और निगम प्रबंधन से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति अथवा राय मांगा है। गौरतलब है कि 1में सरकार ने 112 में 62 राष्ट्रीयकृत राजमार्गो को निजी बसों के लिए खोल दिया था। अब विभाग का तर्क है कि राज्य की सड़कों पर यात्रियों और यातायात में बढ़ोतरी की तुलना में निगम की बसों की संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। इससे यात्रियों को काफी परशानी का सामना करना पड़ता है। लिहाजा इन मार्गो को अराष्ट्रीयकृत करना जरूरी हो गया है। वैसे सरकार की इस कार्रवाई से आर्थिक रूप से बदहाल निगम की परशानी बढ़ सकती है जिसके लिए उसके अधिकारी ही अधिक जिम्मेदार होंगे। दरअसल निगम में चलने लायक बसों की संख्या 620 है, जबकि वहां औसतन 310-315 बसें ही हरेक माह चलती हैं। अगर उसकी 80 प्रतिशत बसें भी ऑन रोड रहती तो शायद ऐसी नौबत नहीं आती।ं

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