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निजी हाथों में होगा 15 सौ किमी सड़क का स्वामित्व

राज्य सरकार पथ निर्माण विभाग के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 68 सौ किलोमीटर सड़क में से 15 सौ किलोमीटर सड़क के निर्माण और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी जल्द ही एक निजी कंपनी (आइएलएफएस) को देगी। कंपनी खुद ही इसके लिए टेंडर निकालेगी, सड़क बनवायेगी और टॉल टैक्स वसूलेगी। इतना ही नहीं, सड़क के किनार पेट्रॉल पंप और होटल बनाने के लिए अपनी मंजूरी देने के एवज में कंपनी संबंधित पक्ष से पैसा भी लेगी। इस सड़क पर कंपनी का स्वामित्व 20 साल तक रहेगा। राज्य सरकार सड़क के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान कंपनी कोीसदी सालाना की दर करगी। दरअसरकार सरकार अपने उस फैसले को अंजाम देने जा रही है, जिसके लिए स्पेशल पर्पस व्हेकिल (एसपीवी) का गठन किया गया है। इसके अध्यक्ष खुद सीएम हैं और इसकी टेक्िनकल इवैलुएशन कमेटी का चेयरमैन अब सीएस की जगह पथ निर्माण सचिव को बनाया गया है। इवैलुएशन कमेटी में कार्यपालक अभियंता प्रवीण कुमार और नवीन कुमार को रखने का प्रस्ताव है। इस योजना को मूर्तरूप देने के पीछे सरकार की सोच साफ है। सड़कों के निर्माण पर सरकार को खर्च न करना पड़े और सड़कें भी अच्छी बनें। साथ ही उसकी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी बनानेवाली कंपनी की रहे। लेकिन इतनी लंबी सड़क बनाने की पूरी जिम्मेदारी जिस तरीके से निजी कंपनी को दी जा रही है, उससे सरकार की मंशा पर सवाल उठाये जाने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, निजी कंपनी ने अपने प्रस्ताव में उग्रवाद प्रभावित इलाकों की सड़कें बनाने से मना कर दिया है। कंपनी की नजर मुख्य तौर पर रांची रिंग रोड, गोविंदपुर-साहेबगंज रोड और डुमरी-गिरिडीह वाया देवघर रोड पर है। खास बात यह है कि इस पूरी कवायद में पथ निर्माण विभाग के अभियंताओं के उन सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब राज्य की सड़कें निजी कंपनियां बनावायेंगी, तो विभाग के अभियंता क्या करंगे?

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