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लॉटरी किंग की किस्मत का खेल

लाटरी किंग मणि कुमार सुब्बा एक बार फिर सवालों के घेर में हैं। विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ते हैं। लेकिन हर बार वे विवादों को धता बता निकल लेते हैं। धन की ताकत से या फिर बल की ताकत से। लेकिन इस बार वे सीबीआई के हत्थे चढ़े हैं। भारतीय नागरिकता को लेकर वे विवाद में हैं। सीबीआई ने उनके जन्म प्रमाणपत्र और स्कूल प्रमाणपत्र की सत्यता पर संदेह व्यक्त किया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट पर अब सुब्बा से जवाब मांगा है। सुब्बा की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका में दावा किया गया है कि कांग्रेस सांसद सुब्बा नेपाल का नागरिक है और उसका असली नाम मणिराज लिम्बो है। उसका जन्म मेछी अंचल में तेपलेजुम जिले में हुआ था। सुब्बा पूवरेत्तर के ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी गूंज ब्रह्मपुत्र नदी के इस पार से उस पार तक गूंजती है। लोकसभा की वेबसाइट में सुब्बा का जन्म दार्जिलिंग के सिलीगुड़ी में बताया गया है। उनके पिता का नाम यहां डी. बी. सुब्बा और मां का नाम बुदवमया सुब्बा लिखा है। वेबसाइट उनकी शिक्षा के बार में जानकारी यह देती है कि उन्होंने दसवीं भी नहीं पास की है। स्थायी पता असम के लखीमपुर जिले में हरमोटी है। उनकी शादियां तो कई हुईं हैं। वेबसाइट में उनकी पत्नी का नाम ज्योति सुब्बा दर्ज है। तीन बेटियों और एक बेटे के वे पिता हैं। वैसे नागरिकता के सवाल पर सुब्बा पर पहले भी मुकदमे चले हैं। लेकिन हर बार वे बच निकले। सुप्रीम कोर्ट में उनका क्या होगा और वह वहां क्या जवाब देंगे, यह देखना बाकी है। सुब्बा असम में दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। बीते चुनाव में अपने भाई एस. आर. सुब्बा को कांग्रेस से टिकट न दिला पाने पर उन्होंने उसे निर्दलीय ही जितवा दिया। फिलहाल वे लगातार तीसरी बार असम की तेजपुर लोकसभा सीट से जीत कर वहां का संसद में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। हर बार टिकट वितरण के समय यह बहस होती है कि सुब्बा को इस बार टिकट नहीं मिलेगा, लेकिन वे जोड़-तोड़ कर टिकट हर बार हासिल कर ही लेते हैं। मीडिया की खबरों में सुब्बा पर यह भी आरोप लगा है कि वह एक हत्या के मामले में 1से 1तक नेपाल की जेल में बंद थे। बाद में वह भागकर भारत आ गए और 1में असम आंदोलन के समय राजनीति में प्रवेश करने से पहले लॉटरी और जुए के कारोबार में उन्होंने अच्छी सफलता हासिल कर ली थी। लॉटरी की दुनिया का उन्हें अब तक किंग कहा जाने लगा था। लॉटरी में सट्टेबाजी की शुरुआत के वे प्रणेता माने जाते हैं। उन्होंने लॉटरी से अरबों रुपए कमाये। लाटरी से जुड़े तमाम घपले-घोटालों में उनका नाम लिया जाता रहा है। अब वे साफ्टवेयर के धंधे में उतर आये हैं। उनकी कंपनी सुब्बा माइक्रोसिस्टम लिमिटेड गुड़गांव में हैसिक्िकम में तो पवन चामलिंग की सरकार को वो हिलाकर अपनी ताकत का सबूत दे चुके हैं। चामलिंग से इसीलिए उनका छत्तीस का आंकड़ा है। चामलिंग ने सुब्बा के काले-सफेद कारनामों का एक विशद दस्तावेज बना रखा है। नागरिकता विवाद के बार में उनका कहना है कि जब भी आम चुनाव होने होते हैं, तो यह विवाद उछाल दिया जाता है। मैं विवाद नहीं चाहता हूं, लेकिन लोग मुझे विवादों में फंसाते रहते हैं। इन विवादों से मुझे फायदा ही होता है। मैं एक के बाद एक चुनाव जीतता रहता हूं। यदि मैं नेपाली होता तो तेजपुर के लोग मुझे बार-बार क्यों जिताते। वे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और बुद्धाीवी हैं।

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