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आईआरसीटीसी के लिए ‘मिनी रत्न’ की सिफारिश

रलवे में खान पान और आतिथ्य सत्कार सेवाओं के व्यावसाईकरण एवं प्रबंधन तथा घरलू एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने की गरा से गठित भारतीय रल खान पान एवं पर्यटन निगम आईआरसीटीसी ने अपनी नौ-दस वर्षो की ‘उपलब्धियों’ के मद्देनजर सरकार से ‘मिनी रत्न’ का दर्जा दिए जाने की मांग की है। निगम की मांग रल मंत्रालय के विचाराधीन है। रल मंत्रालय और आईआरसीटीसी पर सरकारी उपक्रमों से संबंधित संसदीय समिति ने सरकार से आईआरसीटीसी को मिनी रत्न का दर्जा देने के मामले में शीघ्र कार्रवाई करने की सिफारिश की है ताकि यह पेशेवर तरीके से प्रबंधन के लिए अपेक्षित कार्यात्मक स्वायत्तता प्राप्त कर सके। समिति की राय में सितंबर 1में गठित आईआरसीटीसी ने अपने कुछ उद्देश्यों को पूरा करने में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं लेकिन खान-पान, सफाई और रल नीर के उत्पादन और वितरण के मामले में इसकी उपलब्धियां कतई संतोषजनक नहीं रही हैं। समिति ने आईआरसीटीसी के अधिकृत सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 3152 रलवे स्टेशनों को कवर करने वाले खान पान संबंधी कार्यकलापों के बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र में रहने मानकीकरण के अभाव, सुसंस्थापित खान पान ठेकेदारों, कम किराए वाली विमान कंपनियों की ओर से प्रतिस्पर्धा आदि के कारण यह अपने लक्षित उद्देश्यों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है। समिति की राय में देश में आतिथ्य सत्कार उद्योग के प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजरने के कारण आईआरसीटीसी के लिए भी अधिक पेशेवर और कुशल तरीके से काम करना जरूरी हो गया है। इसके लिए समिति ने आईआरसीटीसी को मिनी रत्न का दर्जा दिए जाने की पुराोर वकालत की है। माक्र्सवादी रूपचंद पाल की अध्यक्षता वाली इस समिति ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया है कि आईआरसीटीसी में पूर्णकालिक प्रबंध निदेशक और तीन अन्य निदेशकों के पद पिछले डेढ़ साल से रिक्त पड़े हैं। पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है लेकिन समिति ने प्रबंध निदेशक, निदेशक वित्त एवं दो गैर सरकारी निदेशकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने की सिफारिश की है।

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  • Web Title: आईआरसीटीसी के लिए ‘मिनी रत्न’