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कम वेतनमान पर काम कर रहे यूडीसी

राज्य सचिवालय में तैनात 1000 से अधिक यूडीसी क्लर्क कम वेतनमान पर काम करने को बाध्य हैं। बिहार लिपिकीय सेवा नियमावली लागू हुए दो साल हो गये लेकिन रूटिन क्लर्क, टाइपिस्ट और बिल क्लर्क को नयी नियमावली के अनुसार एसीपी का लाभ कब से मिले, मामला इसी सवाल पर वित्त और कार्मिक विभाग के बीच उलझा है। नतीजतन उन्हें 4500-8000 रुपए वेतनमान पर काम करना पड़ रहा है जबकि उन्हें अबतक प्रथम एसीपी में सचिवालय सहायक (5500-000) और द्वितीय एसीपी के तहत प्रशाखा पदाधिकारी (6500-10500) का वेतनमान मिल जाना चाहिए था।ड्ढr ड्ढr सूत्रों के अनुसार कार्मिक विभाग तो 1से ही एसीपी लाभ देने का पक्षधर है, लेकिन वित्त विभाग का तर्क है कि लिपिकीय सेवा नियमावली 2006 में लागू हुई। इसलिए एसीपी उसी वर्ष से मिलना चाहिए। हालांकि अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे यूडीसी क्लर्को के पास फिलहाल कम वेतनमान पर काम करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बिहार सचिवालय लिपिकीय सेवा संघ के संयोजक सुशील कुमार सिंह कहते हैं, नियमावली देर से लागू होने का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।फिटमेंट कमेटी ने सेवा नियमावली दो माह में लागू करने को कहा था लेकिन इसमें दस साल लग गये। काम समय पर पूरा होने की स्थिति में तो 1े प्रभाव से ही एसीपी मिलता।ं

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