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सरकार लगे प्यारी-अपनी पार्टी भी दुलारी

या करं, क्या न करं-यूपीए के घटक दलों का हाल कुछ ऐसा ही है। इसी में लोस चुनाव का रिहर्सल भी शुरू हो गया है। महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी दलों के तेवर और आंदोलन यूपीए को अब अंदर से हिलाने लगा है। ताजातरीन झामुमो विधायकों - केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक में सरकार के खिलाफ मोरचा नेताओं ने काफी गुस्सा दिखाया है। यह पहली दफा नहीं है। राजद वाले जब बैठते हैं, तो सरकार को सुधरने की नसीहत कुछ इस प्रकार देते हैं: सरकार कामकाज सुधार, वरना भष्म कर देंगे। प्रदेश स्तर पर कांग्रेस की राम कहानी भी जगजाहिर है।ड्ढr कुछ दिन पहले कांग्रेस की कार्यशाला हुई थी। इसमें प्रदेश प्रभारी समेत राष्ट्रीय प्रवक्ता आये थे। नेता- कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ उगले और तैयारी में जुट जाने का मंत्र फूंका। झामुमो ने तो आंदोलन का कार्यक्रम भी सुना दिया है। अब मोरचा बर्दाश्त करने के मूड में नहीं। हालांकि दरम्यान कई मौके पर प्रमुख शिबू सोरन ने सरकार के चलते रहने की गारंटी दी। झामुमो को यह अहसास हुआ है कि पब्लिक सरकार को लेकर अच्छा फील नहीं कर रही। कैसे अपना काम सधे और क्षेत्र में काम हो राजद विधायकों को इससे ज्यादा लेना- देना नहीं।ड्ढr यूपीए के घटक दलों में एमपी- एमएलए को छोड़ कर कार्यकर्ताओं को पूरा अहसास है कि इस सरकार में उनकी कुछ नही चलती। एमपी- एमएलए में भी सबकी धाक है ऐसा नहीं। गिने- चुने की ही चलती है। अब लोस चुनाव के मद्देनजर पार्टी चलानेवाले कार्यकर्ताओं का चेहरा पढ़ने में चूक नहीं करना चाहते। इस स्थिति में पार्टी की बैठक में सरकार को नकारा कहा जाता है। राग अलापा जाता है कि इस सरकार से जनता का भला नहीं होने वाला। पार्टी की बैठक के बाद फिर सरकार को वही प्यार- दुलार मिलत रहता है।ड्ढr

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