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दंगों के दौरान हुई हत्याओं में पाँच व्यक्तियों के खिलाफ अभियोग

बाबरी मसिद ध्वंस के बाद भड़के दंगों के दौरान हुई हत्याओं में पाँच व्यक्तियों के खिलाफ अभियोग की पुष्टि पर सुप्रीम कोर्ट ने बँटा हुआ फैसला सुनाया है। अब यह मामला बड़ी पीठ को सौंपने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा गया है। न्यायमूर्ति एस.बी. सिन्हा ने इस मामले में पाँचों अभियुक्तों को दोषमुक्त करार दिया और उनकी रिहाई के आदेश दिए। वहीं न्यायमूर्ति एच.एस. बेदी ने टिप्पणी की कि देश का पुलिस तंत्र ‘अल्पसंख्यक विरोधी’ है। उन्होंने हरन्द्र सरकार और चार अन्य अभियुक्तों को निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा की पुष्टि कर दी।ड्ढr बाबरी मसिद ध्वंस के एक सप्ताह बाद 14 दिसम्बर 1ो असोम के दबोका जिले के चंगमाजी पथार गाँव में सहरा खातून और उसकी दो पुत्रियों बिमला खातून (3) और हारा खातून (7) की हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने इस मामले में पाँचों अभियुक्तों को दोषी ठहराया था। सांप्रदायिक घटनाओं की जाँच के दौरान पुलिस के रवैए की कड़ी आलोचना करते हुए न्यायमूर्ति बेदी ने कहा कि ऐसे में पुलिस तंत्र का रवैया अल्पसंख्यक विरोधी रहता है। दूसरी तरफ, न्यायमूर्ति सिन्हा का कहना था कि भूमि विवाद के कारण हरन्द्र सरकार और अन्य अभियुक्तों को सहरा के पति ताहिरुद्दीन ने गलत फँसाया था। न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि घटना की प्राथमिकी बहुत देर से दर्ज की गई।

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  • Web Title: दंगों के दौरान हुई हत्याओं में पाँच व्यक्तियों के खिलाफ अभियोग