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नेताओं ने बंद की गैरचा में गाड़ियां

महाराष्ट्र की रािस्ट्रेशन वाली गाड़ियों क ो बगैर टैक्स चुकाए बिहार के राजनेताओं द्वारा धड़ल्ले से उपयोग की खबर प्रकाशित होने पर ऐसी गाड़ी लेने वाले नेताओं में हड़कंप मचा है। अधिकांश नेताओं ने पांच वर्षों के अनुबंध व भाड़े पर ली गई लगरी गाड़ियों को अपने गैरा में बंद कर दिया है। इधर ऐसी नम्बर वाली गाड़ियों पर परिवहन विभाग और पुलिस की सख्त नजर से भी सनसनी फैली है। बताया जाता है कि ऐसी गाड़ी लेने वालों में हर दल के नेता शामिल हैं। नेताओं को ऐसी गाड़ी अनुबंध पर देने वाली कंपनी का दावा है कि उसने कई केन्द्रीय मंत्री, सांसदों और विधायकों क ो ऐसी गाड़ियां दी है। बहरहाल कल तक सरपट बिहार की सड़कों पर ऐसी दौड़ती गाड़ियां अब कम ही दिखाई पड़ रही है। राजधानी पटना में तो अचानक इनकी रफ्तार में मानो ब्रेक लग गया है।ड्ढr ड्ढr उधर ट्रांससिटी ट्रवेल्स कंपनी प्रा.लि. के आपरशन मैनेजर उदय कुमार ने पूणे से फोन पर बताया कि शीघ्र ही वे सार कागजात लेकर पटना पहुंच रहे है जिसमें बिहार के नेताओं को दी गई गाड़ियां फायनांसर से लेने के प्रमाण हैं। उदय का दावा है कि सारी गाड़ियां उसकी हैं पर वह इस सच्चाई को स्वीकार करते है कि उन्हें अनुबंध पर प्राइवेट नंबर की गाड़ी भाड़े पर देने का कोई अधिकार नहीं है।ड्ढr ड्ढr कंपनी के इस मैनेजर ने यह भी खुलासा किया कि उनकी कंपनी बिहार में व्यवसाय करना चाहती थी पर, विधायक रामा सहित दर्जनों राजनेताओं ने उसकी कंपनी के 80 लाख रुपए जबरन रख लिए। ये नेता न तो अनुबंध के अनुसार पैसे दे रहे हैं न ही वापस गाड़ी लौटा रहे है। उदय के अनुसार कंपनी शीघ्र ही इन सभी नेताओं के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने जा रही है। इस संदर्भ में लोजपा विधायक रामा सिंह ने सार आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। बहरहाल कंपनी के दावों में कितना दम है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा पर इस फर्जीवाड़े ने यह साबित कर दिया है कि इस हम्माम में सभी नंगे हैं।

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