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वर्षो बाद पहुंचा व्हाइट बैक्ट गिद्धं

विलुप्ति के कगार पर पहुंचे चुके गिद्धों को वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में देखकर वन अधिकारी काफी प्रसन्न हैं। इन गिद्धों की टोली से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया है। देखने में भले ही ये आकर्षक नहीं लगते हों, लेकिन मृत जानवरों के सड़े गले शव को खाकर वातावरण को एक प्रकार से शुद्ध करने वाले इन अपमार्जक गिद्धों का यहां विशेष रूप से स्वागत किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के निदेशक भारत ज्योति वातावरण की शुद्धता के हिसाब से इसे एक शुभ संकेत मानते हुए बताते हैं कि ‘व्हाइट बैक्ट’ प्रजाति के गिद्ध परियोजना के इर्स्टन सेक्टर में देखे जा रहे हैं जहां इनकी विशेष देखभाल की जा रही है। हालांकि इन गिद्धों के रख रखाव के बार में अपनी किसी विशेष योजना का उन्होंने खुलासा नहीं किया लेकिन वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में वर्षो बाद पहुंचे इन गिद्धों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। श्री ज्योति ने बताया कि ‘व्हाइट बैक्ट’ गिद्ध परियोजना के गनौली, मदनपुर, ठारी, गोवर्धना तथा मंगुराहा में देखे जा रहे हैं। पश्चिमी चंपारण से लगभग एक दशक पूर्व विलुप्त हो चुके इन गिद्धों के अचानक आने से आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा का माहौल है।ं

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