DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

इतिहासकार भी खेमेबाजी में बंटे : ब्रह्मचारी

बिहार सहित पूरा पूर्वी क्षेत्र पुरातात्विक अवशेषों के मामले में काफी समृद्ध है। खासकर झारखंड व बंगाल के सीमा क्षेत्र के इलाके। इन इलाकों में हुए उत्खननों से पाषाणकालीन, पुरापाषाण कालीन कई महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। इन क्षेत्रों में और उत्खनन होने चाहिए। पूरा पूर्वी क्षेत्र पुरातत्व के मामले में एक है।ड्ढr ड्ढr कोलकाता विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के अध्यक्ष डा.आरके चट्टोपाध्याय ने शनिवार को इतिहासकार व पुरातत्वविद् बीपी सिन्हा की पुण्यतिथि पर आयोजित स्मृति व्याख्यान देते हुए यह बातें कहीं। इसका आयोजन बिहार पुराविद् परिषद के बैनर तले पटना संग्रहालय के सभागार में किया गया था। मुख्य अतिथि कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्याल के पूर्व कुलपति डा. ब्रह्मचारी सुरन्द्र कुमार थे जबकि अध्यक्षता पटना विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डा. कामेश्वर प्रसाद ने की।ड्ढr इस मौके पर श्रीमती बीपी सिन्हा, उनकी दो पुत्रियों सहित परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। बिहार,बंगाल,झारखंड व उड़ीसा के पुरातत्वस्थलों को लेकर कई शोध कर चुके डा. चट्टोपाध्याय ने खड़गपुर,पूर्वी सिंहभूम,हजारीबाग, भरतपुर आदि से मिले पुरावशेषों के आधार पर अपनी बातें विस्तार से बतायीं।ड्ढr ड्ढr मुख्य अतिथि श्री ब्रह्मचारी ने चिंता जताते हुए कहा कि आज इतिहास पर भी राजनीति हावी हो गयी है। इतिहासकार खेमेबाजी में बंटे हैं। पुराविदों को तटस्थ होकर इसका विश्लेषण करना चाहिए वरना हम सही जानकारी नहीं पा सकेंगे। अध्यक्षीय भाषण में डा. प्रसाद ने कहा कि स्व. सिन्हा ने बिहार के पुरातत्व को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलायी। बाबरी मस्जिद व पाटलिपुत्र के संबंध में बेबाक विचार के लिए आलोचना भी सहनी पड़ी पर वे अपनी बातों से पीछे नहीं हटे। डा.प्रकाश चरण प्रसाद ने कहा कि अयोध्या के बाबत स्व. सिन्हा ने जो बातें कहीं उत्खनन के दौरान सही साबित हुईं। मौके पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राम उपदेश सिंह, केपी जायसवाल संस्थान के निदेशक डा.विजय कुमार चौधरी, राजीव रंजन प्रसाद, विजय कुमार आदि भी उपस्थित थे। महासचिव उमेशचंद्र द्विवेदी ने संचालन किया।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: इतिहासकार भी खेमेबाजी में बंटे : ब्रह्मचारी