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पाक मीडिया : शतरंचा की चाल चलते मुशर्रफ

परंतु यह उलटी गिनती अब एक मई 2008 को खत्म हो गई और मुद्दा अधर में ही लटका है। पीपुल्स पार्टी इसे बहुमुखी संवैधानिक संशोधन लाकर निपटाना चाहती है, जिससे राष्ट्रपति के उन जबरदस्त अधिकारों को खत्म किया जा सके, जिससे वह आज की तिथि में प्रयोग कर इस सरकार को ही खत्म कर सकते हैं। अब यह सांप के मुंह में छछूंदर की तरह है कि निगलना और उगलना मुश्किल है। इस बात पर इतनी बहस हो चुकी है पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला, जिससे आम लोग और जानकार तथा मीडिया हताश लगते हैं। बात यहां तक पहुंच गई कि आसिफ जरदारी दुबई भाग गए। नवाज शरीफ की पार्टी वाले और दूसरी पार्टियों वाले जसे जमायत-ए-इस्लामी, ऑल पार्टी डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने इतना दबाव डाला कि न केवल मुस्लिम लीग (नवाज) के प्रतिनिधि, स्वयं नवाज शरीफ दुबई गए और आसिफ जरदारी से जवाबदारी मांगी। नवाज शरीफ ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दोहराया कि समझौते के अनुसार जजों को बहाल किया जाएगा, साथ ही कहा कि हम पार्टी की मीटिंग जो शुक्रवार को होने वाली है, में जरूरी जानकारी देंगे। इससे पहले यह भी डर है कि नवाज शरीफ की पार्टी सरकार से इस्तीफा न दे दे। उधर यह भी लग रहा है कि मुशर्रफ से समझौते की बात भी चल रही हो। नवाएवक्त और दि नेशन ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मुशर्रफ के कानूनी सलाहकार एक मसौदे को आखिरी शक्ल दे रहे हैं जिसके मुताबिक मुशर्रफ के तीन नवम्बर 2007 के कारनामों को स्वीकार कर मुशर्रफ पर कोई कानूनी कार्रवाई न करना है। सूत्र यह भी कहते हैं कि इसके पीछे अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब का आशीर्वाद है। दि नेशन और दि न्यूज ने कहा है कि यह जरूरी है कि नवाज शरीफ और आसिफ जरदारी को आपसी मतोद जल्दी खत्म करके और कोई ऐसा काम न कर दें कि फिर प्रजातंत्र बिखर जाए। उन्हें अब आम लोगों की तकलीफों जसे महंगाई, सुरक्षा, बिजली और बेकारी पर ध्यान देना चाहिए। फ्रंटियर पोस्ट ने, अमेरिका सरकार की आतंकवाद पर अपनी 2007 की रिपोर्ट जो अब पेश हुई है के हवाले से कहा है कि ‘फाता’ के कई इलाके और उत्तर पश्चिमी सीमाप्रांत अब अलकायदा, तालिबानी और विदेशी आतंकवादियों का गढ़ बन गए हैं। यह लोग यहां छिप कर सुरक्षित हुए हैं और पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान में हमले और आतंक मचाते हैं। अमेरिकी और नाटो की दूसरी फौों जो अफगानिस्तान में तालिबानियों से लड़ रही हैं, चाहती है कि पाकिस्तान सरकार तालिबानियों से सख्ती करती रहे, और अगर बातचीत भी करनी है, उन्हीं से कर जो हथियार छोड़ रहे हैं। अमेरिका ने प्रधानमंत्री गिलानी के इस बयान का स्वागत किया है कि हालांकि हम इस इलाके को पाकिस्तान सरकार की नीति के मुताबिक आर्थिक, और सामाजिक मदद करंगे, पर जरूरत पड़ने पर ताकत का इस्तेमाल भी हो सकता है। फाता इलाके जो पाकिस्तान-अफगान सीमा पर हैं केन्द्र शासित इलाके हैं। यहां के लोग सदियों से बेबाक और स्वतंत्र विचारों के हैं किसी सरकार के बस में नहीं रह सके। अंग्रेज भी अपनी दो सौ साल की हुकूमत के दौरान इन्हें काबू में नहीं कर सके और यहां अपना राज अपने बनाए हुए एजेंटों से चलाते रहे। यहां का कानून भी पाकिस्तान से अलग है। यहां के सबसे खतरनाक आतंकवादी नेता बैयतुल्ला महसूद जो वजीरिस्तान एजेंसी के महसूदी कबीले के हैं, तहरीक-ए-तालिबान के अमीर हैं। हालांकि इन्होंने एक तरफा जंगबंदी का ऐलान किया है और अपने अनुयायियों को हुक्म दिया है कि अगर किसी ने अब सरकार के खिलाफ हरकत की तो उसे सरआम फांसी दे कर उल्टा लटकाया जाएगा। इसके बावजूद भी आतंक की घटनाएं जारी हैं। बाजोर एजेन्सी के तहरीके-तालिबान के नायब अमीर मौलवी फकीर ने समाचार पत्रों को धमकी दी है कि अपने समाचारपत्रों में औरतों की अश्लील व भद्दी तस्वीरं न छापे, नहीं तो हम सख्त कार्रवाई करंगे और लोगों को बाइकाट का हुक्म देंगे। ओरकााई एजेंसी में दो सिखों को अगवा करने वाले लोगों को पकड़ लिया गया है और शायद मार भी दिया जाए। डॉन और दूसर समाचार पत्रों ने लिखा है कि ‘दर्रा आदम खेल’ जो पेशावर और कोहाट के बीच स्थित है एक बार फिर तालिबानियों के कब्जे में आ गया है। यहां हर किस्म के हथियार गैर कानूनी तरीके से बनाए जाते हैं और सरआम बेचे जाते हैं और अफरीदी कबीले से जुड़े हुए हैं। इससे पहले भी फरवरी में काफी लड़ाई हुई थी और हाारों लोग बेघर हो गए थे। इन्होंने दो फौाियों को बंधक बना लिया है और अपनी ओर से लगाए हुए टैक्स वसूल कर रहे हैं। यहां की कोयला खदानों से निकलने वाले हर ट्रक पर 1000 रु. टैक्स लगा दिया गया है।

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