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चोरी को रोचागार का दर्जा मिले

चोरी करना अपराध है। नैतिकता की दृष्टि से अनैतिक है। धर्म की दृष्टि से पाप है। लेकिन मेर इस मत से कुछ लोग असहमत भी हो सकते हैं कि पापी पेट को भरने के लिए चोरी सहित कोई भी बड़े से बड़ा दुष्कर्म भी क्षम्य है। आज भारत में जहां वेश्यावृत्ति को कानूनन सही बनाने के प्रयास हो रहे हैं तो क्या कारण है कि हम चोरी को रोगार की मान्यता नहीं दे सकते हैं। विनम्र प्रार्थना है कि एक बार प्रयोग के तौर पर चोरी को रोगार घोषित करने की पहल तो हो। भूखों का कुछ भला हो जाए।ड्ढr ठाकुर सोहन सिंह भदौरिया, बीकानेर क्या यही प्यार है यह कहना गलत नहीं होगा कि लड़ाई न सिर्फ आतंकवाद के सिद्धांत का अभिन्न अंग है, बल्कि यह वामपंथियों की राजनीति में भी हर कदम पर नार आती है। यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे चार वामपंथी दलों माकपा, फारवर्ड ब्लॉक आदि ने पिछले कुछ दिनों से मनमोहन सिंह सरकार की नाक में दम कर रखा है। वह सहयोग की बात तो करते हैं परंतु उनसे टकराव मोल लेते हुए भी साफ दिखाई देते हैं। माकपा के पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात ने एक ओर यूपीए और वामपंथी दलों के बीच समन्वय समिति का गठन भी किया, वहीं अगली सांस में उन्होंने जरूरी चीजों के दाम में बढ़ोतरी और सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ने से भी उन्हें कोई गुरा नहीं है। कुछ दिनों पहले प्रकाश करात ने अपने एक बयान में कहा था कि हम यूपीए के अंग नहीं हैं और तो और हम यूपीए समिति की बैठकों में उनके आमंत्रण पर ही जाते हैं। यह कैसा प्यार है?ड्ढr नीरा चौहान, जी.टी.बी. इन्क्लेव, दिल्ली सराहनीय कदम पुलिस के एसएसपी आलोक मित्तल ने अपनी कुर्सी से उठकर, जनता के बीच जाकर जो पुलिस की भूमिका देखी, तो उन्हें समझ आ गया कि पुलिस के चंद सिपाही पूर पुलिस विभाग की छवि को धूमिल कर रहे हैं। इस तरह सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण बिना सूचना के अपने विभागों का दौरा करं, तो उन्हें भी जनता की ओर से सराहना ही मिलेगी तथा अधिकारीगणों को खामियों का पता चलेगा कि पूरी दाल काली नहीं है।ड्ढr श्रीचरन, दक्षिण पुरी, नई दिल्ली समाज सेवी संस्थाएं दें सहयोग चंडीगढ़ में लगातार बढ़ रही आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय हैं। पिछले वर्ष चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा जारी आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि पंजाब और हरियाणा में आत्महत्या की वारदातें तेजी से बढ़ रही हैं। स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह बहुत जरूरी है कि समाज सेवी संस्थाओं को तनाव व अवसाद कम करने के लिए एक सार्थक अभियान चलाना जाए। इससे समाज में बढ़ रही आतमहत्या जसी घटनाओं को जरूर कम किया जा सकता है।ड्ढr मधुबाला, हिम्मतगढ़, जीरकपुर दांव न खेले सरकार महंगाई के खिलाफ केन्द्र सरकार भले ही कितने दांव खेले, सभी दांव तब तक विफल होंगे, जब तक जागरूक उपभोक्ता का समर्थन उसे प्राप्त नहीं होगा, जमाखोरों और कृत्रिम अभाव पैदा करने वालों को जब तक बेखौफ छोड़ा जाएगा, तब तक आम आदमी को महंगाई की मार से नहीं बचाया जा सकता।ड्ढr डॉ. सुधाकर आशावादी, ब्रह्मपुरी, मेरठ

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