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एटमी डील फेल कराने पर उतारू वाम

एटमी करार पर सरकार के साथ6 मई को प्रस्तावित बैठक में वाम दल अंतरराष्ट्रीय एटमी ऊरा एजेंसी (आईएईए) में चली वार्ता प्रकिया के बार में और ब्यौरा मांगेंगे। हालांकि सरकार ने अभी तक मार्च मध्य में हुई बैठक के बाद माकपा की ओर से लिखे उस नोट का कोई जवाब नहीं दिया है जिसमें आईएईए से सेफगार्ड एग्रीमेंट और भारत के असैन्य एटमी ऊरा प्लांटों को ईंधन सप्लाई न रोकने की गारंटी समेत कुछ और सवाल पूछे गए थे। वाम दल 123 समझौते पर हाईड एक्ट की बंदिशों के विरोध में आरंभ से ही आवाज उठाते रहे हैं क्यों कि उनका मानना है कि हाईड एक्ट भारत के परमाणु कार्यक्रम पर नकेल कसने के साथ ही विश्व में अमेरिकी साम्राज्यवाद के विस्तार में भारत को साझीदार बनाने के दुष्चक्र अलावा कुछ नहीं है। अमेरिका ने भी करार होने से लेकर हाल तक इस बाबत अपने इरादों को छिपाया नहीं । उसने पहले ही यह साफ कर दिया था कि हाईड एक्ट से 123 समझौता पूरी तरह बंधा हुआ है। हालांकि पिछले दिनों बुश प्रशासन की ओर से मामले में यह कहकर लीपापोती करने की कोशिशें हुई कि हाईड एक्ट से भारत का कोई ताल्लुक नहीं है और इससे मानने की भारत पर कोई बंदिशें नहीं हैं। बुश प्रशासन की जल्दबाजी बुश प्रशासन ने करार पर अमेरिकी कांग्रेस की मुहर लगाने के लिए जुलाई महीने को अंतिम समय सीमा बताया है। उसके बाद अमेरिका में राष्टपति चुनाव नजदीक आने से अमेरिकी कांग्र्रेस की बैठक आहूत करने में कई संवैधानिक व तकनीकी अड़चने सामने आ जाएंगी। यही वजह है कि कुछ समय से अमेरिका ने करार पर भाजपा को लाइन पर लाने के लिए पूर्व राष्टीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्रा समेत कुछ रक्षा विशेषज्ञों के माध्यम से लाबिंग कराई लेकिन भाजपा में एटमी करार विरोधियों के हावी होने की वजह से बृजेश मिश्रा अलग- थलग पड़ गए। लेफ्ट की रणनीति वाम दलों की मंशा साफ है। वे करार को जुलाई तक पूरा करने की बुश प्रशासन की रणनीति को मौजूदा अमेरिकी कांग्रेस के कार्यकाल में कतई पूरा नहीं होने देना चाहते। एक शीर्ष वाम नेता ने बताया कि आगामी मंगलवार को सरकार के साथ होने वाली बैठक में वे सरकार से मांग करंगे कि आईएइए से हुए सहमति के बिंदुओं पर उन्हें ठोस जानकारी दी जाए। अगर सरकार ने वाम दलों को कुछ जानकारी दी भी तो उस पर विचार के लिए वाम दल लंबा वक्त मांगेगे ताकि जुलाई में एटमी करार को परवान चढ़ाने की बुश प्रशासन की कोशिशों पर पलीता लगा रहा। बकौल एक वाम नेता के छह मई की बैठक में कुछ नहीं होने वाला। सिर्फ इतनी ही उम्मीद रखें कि इस बैठक में अगली बैठक की तारीख तय होगी।

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