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यह कैसी फीस वृद्धि?

किस राह पर है हमारा देश शायद कांग्रेस ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जगदीश टाइटलर को टिकट और सीबीआई की क्लीन चिट का मुद्दा इतना उछल जाएगा। पत्रकार जरनैल सिंह के जूते ने तो जसे ताबूत में आखिरी कील का काम किया है। अब कांग्रेस टाइटलर को सलाह दे रही है कि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें। क्या पार्टी की अपनी कोई अंतरात्मा नहीं है। कर्नल (रि.) सुराीत सिंह, चंडीगढ़ पूरी दुनिया के लिए खतरा पाकिस्तान पूरी दुनिया के लिए खतरा बन गया है। आज से कुछ साल पहले किसने कल्पना की थी कि एटम बम से लैस एक राष्ट्र अंदर से इतना खोखला हो सकता है कि वह मुट्ठी भर आतंकवादियों के सामने घुटने टेक देगा। पाकिस्तान ने स्वात घाटी में जिस तरह तालिबानियों के आगे हार मान कर समझौता किया, उसे पूरी दुनिया ने देखा है। ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी सरकार आतंकवादियों से लड़ने की इच्छाशक्ित खो चुकी है। कहीं ऐसा न हो कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर आतंकवादियों का कब्जा हो जाए। यह सभी देशों के लिए खतर की बात होगी। राम सिंह, फेा 4, मोहाली बेमतलब का इतिहासबोध इतिहास को लेकर हम बहुत संजीदा हैं। आपस में लड़ते भी हैं। कई बार यह लड़ाई चिंतन, मित्रता और विकास में बाधा बनती है। हम इसका पुनमरूल्यांकन करं तो यह कोई सम्राट अशोक या अकबर का इतिहास नहीं है। याद करं आज से सत्तर-अस्सी साल पहले तक लोग पहाड़ों में इधर से उधर माइग्रेट होते रहे हैं। हरिद्वार समेत 2001 में उत्तराखंड की जनसंख्या 84 लाख थी। उसकी आबादी 17 लाख है। हरिद्वार तब उत्तराखण्ड में नहीं था। आजादी से पहले पहाड़ में गांव के गांव संक्रामक बीमारियों से मर जाते थे। इसलिए इतिहास को लेकर अति गर्वित होना खास महत्व नहीं रखता। गढ़वाल में सौ से भी अधिक गढ़ थे। सवाल है कि उत्तराखंड में कोई बड़ा किला या महल क्यों नहीं है। जनता हर काल में भूखी-नंगी रही है। यह इतिहासबोध बेमतलब का है। विजय जुयाल, विजय पार्क हेमलेट जरा साड्ढr दू दो तोड्ढr छनछनाती है।ड्ढr सिर पेड्ढr चढ़ा लोड्ढr धूपड्ढr छन के आती है। शरद जायसवाल, कटनी, मध्य प्रदेश

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