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सूबे में हर घंटे 16 बच्चोंकी मौत

यूनिसेफ के कार्यक्रम पदाधिकारी डा. शिरिन वर्की ने बताया कि बिहार में हर घंटे 16 बच्चों की मौत होती है। साथ ही हर माह करीब 400 बच्चे विभिन्न प्रकार की बीमारियों के कारण मौत को गले लगाते हैं। ये सभी बच्चे एक वर्ष से कम उम्र तक के होते हैं। पूर भारत में बच्चों की मृत्यु दर में बिहार का योगदान 10 फीसदी है। डा. वर्की रविवार को कुर्जी होली फैमिली में ‘प्रसव कक्ष में नवजात की देखरख’ विषय पर आयोजित अनवरत चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (सीएमई) को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. निगम प्रकाश नारायण ने बताया कि नवजात के लिए प्रसव के बाद का पहला मिनट अधिक महत्वपूर्ण होता है। औसतन 0 फीसदी नवजात की सांस प्रसव के बाद सामान्य हो जाती है। उन्होंने कहा कि 10 फीसदी नवजातों के श्वसन क्रिया को सामान्य बनाने की आवश्यकता होती है।ड्ढr ड्ढr प्रसव के बाद किसी बच्चे की सांस न चले तो चिकित्सक द्वारा हल्के थप्पड़ देने की जरूरत होती है। इस हल्के प्रयास से भी सांस न लौटे तो बैग एण्ड मास्क की सहायता लेकर सांस लौटाने का प्रयास होना चाहिए। इस प्रक्रिया के लिए प्रसव कक्ष में गर्म वातावरण ((28-32 डिग्री से.ग्र)होना आवश्यक है। प्रशिक्षण के बल पर नवजात मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। डा.हिमा चरण ने बताया कि बच्चों में मिर्गी रोग का कारण ब्रन में ऑक्सीजन की कमी है। नवजात के श्वसन का सही प्रबंधन हर हाल में होना चाहिए। डा. श्रवण कुमार का कहना था कि नवजात की सांस लौटाने में नई दवा से मदद ली जा सकती है। कार्यक्रम का उद्घाटन पीएमसीएच की शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा.संजाता राय चौधरी ने किया। कुर्जी होली फैमिली की मेडिकल डायरक्टर डा.विद्या कपूर ने विशेषज्ञों का स्वागत किया जबकि डा.अलका सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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