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बंबई वन भूमि क्षेत्र के लोगों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

बंबई वन भूमि क्षेत्र में बने फ्लैटों में रह रहे लाखों लोगों को सोमवार को उस समय राहत मिली जब उच्चतम न्यायालय ने अपने अगले आदेश तक सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। बिल्डरों ने प्रशासन के साथ मिलकर हरित पट्टी के करीब एक हजार एकड़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में फ्लैट और भवन अवैध रूप से बना डाले हैं। मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन और न्यायमूर्ति एमके शर्मा ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 22 अगस्त तय की। बंबई उच्च न्यायालय ने हरित पट्टी में बने करीब 34 भवनों को गिराने का आदेश दिया था। इस क्षेत्र में किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसके अगले आदेश तक क्षेत्र में न तो कोई निर्माण होगा और न ही कोई भवन गिराया जाएगा।इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में हजारों फ्लैट निर्माणाधीन हैं। इससे पहले याचिकाकर्ता के वकील एफएस नरीमन ने दलील दी कि क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर निर्माण कार्य हुए हैं। वन संरक्षण कानून के तहत वन संरक्षित क्षेत्र में सभी निर्माण गैर कानूनी हैं और बिल्डर्स वास्तव में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले हैं। प्रतिवादी पक्ष के वकील ने दलील दी कि इस क्षेत्र के अधिकांश फ्लैट वन क्षेत्र के बाहर हैं। उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को ध्यान में नहीं रखा कि बिल्डरों ने भवन निर्माण करने में बड़ी धनराशि निवेश की है।

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  • Web Title: बंबई वन भूमि क्षेत्र के लोगों को राहत