अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

थाली पर नार

विश्व खाद्यान्न संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश का बयान एक ऐसा झूठा-सच है जिसके विरोध में आज सार भारतीय राजनैतिक दल एकाुट हैं। अपनी विदेश मंत्री कोंडालिसा राइस के बाद बुश साहब भी मानते हैं कि दुनिया के बाजार में गेहूँ, चावल, दालों व अन्य खाद्यान्नों के लिए जो मारामारी मची हुई है, उसकी वजह भारत और चीन में आई खुशहाली और वहां के मध्यवर्ग की बढ़ी जरुरतें हैं। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि तीव्र आर्थिक विकास के चलते भारत का मध्य वर्ग खूब फला-फूला है और उसकी खाद्यान्न खपत भी बढ़ी है। किंतु यह अधूरा सत्य है। पूरा सच यह है कि पिछले कई बरसों में भारत में प्रतिव्यक्ति खाद्यान्न खपत स्थिर है जबकि अमेरिका में 2003-2007 के बीच यह से बढ़कर 1046 किलोग्राम प्रतिवर्ष हो गई है। अमेरिकी आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि वहां औसत खाद्यान्न खपत भारत से पांच गुना और चीन से तीन गुना ज्यादा है। ऐसे में जनाब बुश को भारतीय नागरिकों की थाली पर नजर डालने के बजाए अपने पेटू नागरिकों को नसीहत देनी चाहिए। सच की दूसरी कड़ी यह है कि दुनिया के तेल बाजार में लगी आग से घबराकर अमेरिका और अन्य विकसित देश वैकल्पिक ईंधन की खोज में खाद्यान्नों की खेती का बंटाधार करने पर उतारु हैं। पेट्रोल के बजाय जव ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए वहां गेहूँ के स्थान पर मक्का और ईंख उगाने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है। आज अंकल सैम के देश में पैदा हो रही मक्का का पच्चीस फीसदी हिस्सा जव ईंधन बनाने में इस्तेमाल हो रहा है। अफ्रीका और एशिया के गरीब देशों में एक वक्त की रोटी के लिए तरस रहे करोड़ों लोगों के बजाए वाशिंगटन की अपने देश में कार चलाने वालों की चिंता है। अमीर देशों की अधिकांश आबादी मांसाहारी है। जिन जानवरों का मांस खाया जाता है उन्हें भारी मात्रा में खाद्यान्न खिलाना पड़ता है। खाद्यान्न संकट से निपटने का एक उपाय शाकाहार के मार्ग पर चलना भी है। मौसम में बदलाव का असर खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ा है। मौसम के साथ खिलवाड़ के लिए भी अमेरिका व यूरोपीय देश ही सर्वाधिक जिम्मेदार हैं। अच्छा हो राष्ट्रपति बुश खाद्यान्न संकट के वास्तविक कारणों को दुरुस्त करने के प्रयास करं। दुनिया में अमन-चैन के लिए दो-ाून भोजन का बंदोबस्त जरूरी है। सम्पन्न होने के नाते इसकी नैतिक जिम्मेदारी अमेरिका की है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: थाली पर नार