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आई-लीग में फिर खेलेंगी 12 टीमें

देश की पहली प्रोफेशनल फुटबॉल लीग-आई लीग के फॉर्मेट में बदलाव के लिए जसा राष्ट्रीय कोच बॉब हॉटन चाहते थे, वैसा नहीं हुआ। हालांकि दूसर संस्करण के लिए लीग में 12 टीमों को ही जगह दी गई है। ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरशन-एआईएफएफ ने टीमों की संख्या का निर्धारण करने के लिए दो सदस्यीय समिति बनाई थी। एसआर देव और अतुओ मेजहुर की समिति ने सोमवार को इसके बार में फैसला लेते हुए टीमों की संख्या 10 से बढ़ा कर 12 कर दी। पहली लीग (2007-08) में 10 क्लबों को प्रवेश दिया गया था। साथ ही ये फैसला किया गया था कि सबसे नीचे की दो टीमों को रलीगेट करके दूसरी डिविजन में डाल दिया जाएगा और दूसरी डिविजन की टॉप चार टीमों को आईलीग में प्रमोट कर दिया जाएगा। दूसरी ओर राष्ट्रीय कोच चाहते थे कि दूसर संस्करण में 14 टीमों को प्रवेश दिया जाए ताकि उंचे स्तर पर ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को अपना प्रदर्शन दिखाने का मौका मिले लेकिन आज समिति ने साफ कर दिया कि आगामी सत्र में आई-लीग में 12 टीमें खेलेंगी। हालांकि समिति ने 14 टीमों की हॉटन की इच्छा तीसर संस्करण 2000 में पूरी करने की सिफारिश जरूर कर दी है। समिति के फैसले के अनुसार, पिछले सत्र में नौवें और दसवें स्थान पर रहने वाली सलगावकर और वीवा केरल अगले सत्र (2008-0में लीग मे नहीं खेल पाएंगी। जबकि दूसरी डिविजन में टॉप पर रहने वाली चार टीमें-मुंबई फुटबॉल क्लब, मोहम्मडन स्पोर्टिग, चिराग युनाइटेड और वास्को अन्य आठ टीमों के साथ पहली डिविजन में खेलेंगी। समिति ने इसके साथ ही कहा, 2000 के सत्र में अगर प्रायोजकों से मिलने वाली राशि में कुछ बढ़ोतरी हुई तो टीमों की संख्या 14 की जा सकती है। हालांकि इस बार में फेडरशन की कार्यकारी समिति और नेशनल फुटबॉल लीग की जांच समिति को इस बार में 2008-0ी लीग शुरू होने से पहले इस पर विचार-विमर्श करना होगा।ं

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