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जजों की नियुक्ित में पारदर्शिता नहीं

बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एसएनपी सिन्हा ने कहा है कि जजों की नियुक्ित की प्रक्रिया में बदलाव की जरूरत है। वर्तमान में इसके लिए जो सिस्टम है, वह पारदर्शी नहीं है। जज की नियुक्ित का अधिकार जजों को दिया गया है। जज जिसका नाम भेजते हैं उसी पर कॉलेजियम निर्णय लेती है। इसमें बदलाव लाना होगा। नियुक्ित प्रक्रिया बदलने के लिए कौंसिल केंद्र सरकार को प्रस्ताव देगी, ताकि इसे पारदर्शी बनाया जा सके। सिन्हा पांच मई को रांची में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘सूचना का अधिकार’ कानून के दायरे में न्यायपालिका भी है। बार कौंसिल के अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के उस बयान पर असहमति जतायी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह कानून जजों पर लागू नहीं होना चाहिए। सिन्हा कहते हैं कि आम जनता को किसी के भी बार में सूचना प्राप्त करने का अधिकार है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बार कौंसिल ने न्यायपालिका को भ्रष्ट नहीं कहा है। कौंसिल एक सव्रे कराकर आंकड़े तैयार कर रही है। इसमें सभी राज्यों की बार कौंसिल को प्रश्नावली दी गयी है। इसमें सिर्फ जजों से संबंधित सवाल नहीं है, बल्कि वकीलों को भी इसमें शामिल किया गया है। जरूरत पड़ी तो एकत्र आंकड़ों को न्यायपालिका में टॉप लेवल पर रखा जायेगा। भ्रष्टाचार सभी जगह है। वकील भी इसके दायर से बाहर नहीं है। सिन्हा ने कहा कि देश भर के लॉ कॉलेजों के स्टैंडर्ड में गिरावट आयी है। राजस्थान के 167 कॉलेजों में से 100 की मान्यता रद्द की गयी है। पटना में भी 1में से आठ की मान्यता समाप्त की गयी है। झारखंड के मामले में अभी रिपोर्ट नहीं आयी है।

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