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अभी और रुलाएगी बिजली

पाँच साल में बिजली की माँग दोगुनी से ज्यादा मगर उपलब्धता जस की तस। यूपी में बिजली अभी और रूलाएगी। आने वाले महीनों में माँग के दस हाार मेगावाट का रिकार्ड छूने का अनुमान है। यानी रोाना तीन हाार मेगावाट की कटौती।ड्ढr अकेले राजधानी लखनऊ में बीते साल से इस साल माँग में करीब दस फीसदी का इजाफा हुआ है। नोएडा-गाजियाबाद में यह और ज्यादा है। मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट और मॉल बनाने की तेजी ने गए दो-तीन साल में बिजली की माँग में जबरदस्त बूम ला दिया है। ऊपर से ए.सी. लगाने का बढ़ता क्रेा। लखनऊ या नोएडा सरीखे शहरों में यह ज्यादा इसलिए है क्योंकि कटौती नहीं है।ड्ढr उत्तर क्षेत्रीय विद्युत समिति ने उत्तर भारत के राज्यों में आने वाले दिनों में बिजली की माँग का जो अनुमान लगाया है वह हालात का आईना है। सबसे ज्यादा माँग उत्तर प्रदेश के खाते में है। मई से सितम्बर तक इसके रोाना औसतन दस हाार मेगावाट रहने का अनुमान है। प्रदेश के बिजलीघरों की सभी इकाइयों के चालू रहने व केन्द्रीय कोटे से पूरी बिजली मिलने पर उपलब्धता औसतन साढ़े छह हाार मेगावाट। यानी पूरी उपलब्धता में भी करीब तीन हाार मेगावाट की कमी। पूरा उत्पादन न हुआ तो और ज्यादा किल्लत। पिछले साल की जो वास्तविक माँग थी वह यूपी में बिजली की माँग में आई तेजी को और साफ करती है। गए साल सितम्बर में अधिकतम माँग 11 हाार मेगावाट से ऊपर चली गई थी। न्यूनतम माँग भी 8500 मेगावाट थी।ड्ढr बीते वित्तीय वर्ष में अप्रैल से मार्च के बीच माँग व उपलब्धता में आठ फीसदी से 25 फीसदी तक का भारी अंतर था। दिल्ली और हरियाणा की अधिकतम माँग ही चार से साढ़े चार हाार मेगावाट थी। यानी यूपी की माँग से आधी। वहीं पूर उत्तरी भारत में बीते साल की अधिकतम माँग 32 हाार मेगावाट से ऊपर दर्ज की गई।

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