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ब्राह्मण जाति नहीं, संस्कृति है

बिहार सरकार के मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि ब्राह्मण समाज के लिए जीता है और अपने सद्विचारों से समाज का उत्थान करता है। नर से नारायण बनना हो, तो ब्राह्मण की शरण में जाना होगा। अगर ब्राह्मणों को सम्मान नहीं मिला, तो देश सम्मानित नहीं हो सकता। वे सोमवार को हरमू मैदान में आयोजित ब्राह्मण महाधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कोई जाति नहीं, यह देश की संस्कृति और संस्कार है। समाज की अंतिम पंक्ित में खड़े व्यक्ित का उत्थान ब्राह्मण ही करता है। आज लंदन में पंडितों की पूछ हो रही है, लेकिन देश में अपमान हो रहा है। कश्मीर के पंडित भय के माहौल में जी रहे हैं। लेकिन सरकार चुप्पी साधे है। जो मांस और मदिरा का सेवन करता है, वह ब्राह्मण नहीं हो सकता। चौबे ने लोगों से बच्चों को संस्कार देने, सामाजिक समरसता का भाव उत्पन्न करने की अपील की। सेवानिवृत्त आइएएस वैदही शरण मिश्र ने महाधिवेशन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। आलोक दुबे ने महाधिवेशन के 10 प्रस्ताव पेश किये। प्रतिभा पांडेय, पंडित कमलाकांत त्रिपाठी, हनुमान गौड़, रविकांत मिश्रा सहित अन्य ने भी विचार रखे। मौके पर विभिन्न क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले समाज के लोगों को पुरस्कृत भी किया गया।

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