अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

18 लाख खाये, अब पचाने को 19 लाख

पथ निर्माण में टेंडर की माया निराली है। इंजीनियर ‘खेल’ करते हैं, पर त्वरित कार्रवाई की जगह गड़बड़ी पर परदा डालने को सपोर्ट मिलता है। डालटनगंज कोयल नदी का पुल ठीक करने के लिए 18.53 लाख का टेंडर मांगा गया है। इसमें स्पष्ट जिक्र है कि ( त्रुटि) सुधार के लिए यह काम होना है। पिछले वित्तीय वर्ष में इसी पुल को दुरुस्त करने के लिए 18 लाख का काम हुआ था। काम ऐसा हुआ स्थिति पहले से बदतर हो गयी। बीयरिंग कोट में भारी गड़बड़ी हुई। पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी ने सीएम को पत्र लिख बताया था कि भारी गड़बड़ी हुई है। इसके बाद इंजीनियरों की टीम से इस मामले की जांच करायी गयी। जांच कमेटी ने कई बिंदुओं पर गड़बड़ी का उल्लेख किया। बीआइटी से सिमेंट कंक्रीट की जांच करायी गयी। इसमें भारी गड़बड़ी उाागर हुई। जांच कमेटी ने बताया कि एसइ ने नियम विरुद्ध विभागीय काम कराने का आदेश दिया, जबकि टेंडर के लिए समय था। गढ़वा डिवीजन के काम में गड़बड़ी को लेकर भी एसइ के खिलाफ जांच बैठी है। वही एसइ अभी रोड में चीफ इंजीनियर बने बैठे हैं। अब बत इइ की-दूसरी जगह ट्रांसफर हो गया। एइ किसी अन्य मामले में सस्पेंड हो गये। जेइ को खिलाफ भी कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। कहने को विभाग के पास जवाब है कि इस मामले में विभागीय कार्यवाही चल रही है, लेकिन तत्काल और गंभीर कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। एसइ (अब सीइ) जयप्रकाश का कहना है कि जरूरत पर विभागीय काम कराया जा सकता है, लेकिन विभाग इसे कतई नहीं मानता। रांची में राम मंदिर सड़क का काम (10 लाख) विभागीय कराने के लिए सीएम ने अनुमति दी थी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: 18 लाख खाये, अब पचाने को 19 लाख