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आज आयेगा महिला बिल

अगले संसदीय चुनाव की आहट और इस वर्ष की सर्दियों में कई सूबों में होने वाले विधानसभाई चुनावों की पक्ष-विपक्ष की तैयारी के बीच महिला आरक्षण बिल का जिन्न एक फिर निकल आया है। संसद के बजट सत्र में यह विधेयक लोकसभा में तो नहीं आ सका , लेकिन कैबिनेट की बैठक में सोमवार की रात तय हुआ कि विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया जायेगा। हालांकि इस बात की कम ही संभावना है कि बिल अंजाम तक पहुंच पायेगा। सूत्रों के मुताबिक बैठक में रलमंत्री लालू प्रसाद यादव सहित कुछ मंत्रियों ने दलित-पिछड़े-अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए अलग से कोटा तय करने की अपनी पुरानी मांग दोहरायी। बिल को लेकर सत्ताधारी यूपीए ही नहीं, एनडीए में भी दरार दिखायी दे रही है। सरकार में शामिल राजद, द्रमुक और पीएमके आरक्षण के अंदर आरक्षण के अपने फामरूले के तहत दलित-पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए अलग से सीटें आरक्षित करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन द्रमुक और पीएमके सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने पर विधेयक का साथ दे सकते हैं। हालांकि राजद इसके लिए तैयार नहीं है। दूसरी तरफ, भाजपा और सरकार को बाहर से समर्थन दे रहीं वामपंथी पार्टियां बिल को उसके मौजूदा प्रारूप के साथ समर्थन देने को सहर्ष तैयार हैं। लेकिन जदयू साथ नहीं है। जदयू के अध्यक्ष शरद यादव ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी रास में बिल पेश नहीं होने देगी। इसी तरह मुलायम सिंह की सपा भी बिल के खिलाफ है। राज्यसभा में राजद, जदयू और सपा का खेमा एक होकर बिल का हरसंभव विरोध करगा। लालू ने पूछे जाने पर कहा कि हम महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है। ‘हम चाहते हैं कि बिल में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के लिए अलग कोटा तय हो। आरक्षण के अंदर आरक्षण की व्यवस्था ही न्यायसंगत होगी। एसी व्यवस्था के साथ मैं महिलाओं को 33 क्या, 50 फीसदी सीटें देने का पक्षधर हूं।’ इस बीच, राजद संसदीय दल के पदाधिकारियों की बैठक में सोमवार को यहां विधेयक के मौजूदा प्रारूप के विरोध में रणनीति तय की गयी। वाम दलों ने प्रदर्शन किया नयी दिल्ली। विधेयक को जल्द संसद में पेश करने की मांग करते हुए वाम दलों से जुड़े महिला संगठनों ने संसद के सामने प्रदर्शन किया। पूर्व सांसद सुभाषिनी अली की अगुवाई में आल इिंडया डेमोकट्रिक वीमेंस एसोसिएशन और नेशनल फेडरशन आफ इंडियन वीमेन की कार्यकर्ता विजय चौक पर एकत्र हुईं और विधेयक पेश करने की मांग करते हुए नार लगाये। सुभाषिनी अली ने कहा कि जिस परमाणु करार को कोई सही नहीं ठहरा रहा, सरकार उस पर आगे बढ़ने के लिए बेताब है, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक का इतने दर समर्थन कर रहे हैं, फिर भी इसे संसद में नहीं रखा गया है।

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