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सोम को सांसदों के नाथ बने सोमनाथ

पिछले माह की 24 तारीख को सदन की कार्यवाही में बाधा डालने वाले 32 सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार समिति को सौपे गए मामलों पर एक सप्ताह से चल रही सियासी उठापटक का पटापेक्ष हो गया। जिस नाटकीय ढंग से सोमनाथ चटर्ाी ने अपने आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले सांसदों के खिलाफ क ठोर कदम उठाया उसके ठीक विपरीत चले दूसर नाटकीय घटनाक्रम से वे एक सप्ताह में ही फैसला बदलने को विवश हो गए। इसकी बुनियाद पड़ी सोमवार को लोकसभा स्पीकर की पहल पर हुई सर्वदलीय बैठक में जहां सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में सोमनाथ को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।ड्ढr ड्ढr लंबे वक्त तक संसद में आक्रामक विपक्ष की भूमिका में बढ़- चढकर आगे रहे सोमनाथ को विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का यह तर्क छू गया कि विपक्ष की आवाज का संसदीय व्यवस्था में अपनी भूमिका है। फिर सांसदों के हंगामें से रूठे सोमनाथ चटर्ाी का गुस्सा थमा और उन्होंेने सत्ता व विपक्ष की उठापटक और सियासी मिजाज भांपते हुए अपने कदम पीछे खींच डाले। हालांकि बाद में सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के कदम को वापस लेते हुए सोमनाथ चटर्ाी कार्यवाही में इस टिप्पणी को दर्ज करना नहीं भूले कि अध्यक्ष की कुर्सी का अनादर कर लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता।ड्ढr इससे पहले हंगामा मचाने वाले सासंदों के खिलाफ अध्यक्ष की कड़ी कार्रवाई से निपटने को लेकर एनडीए की रणनीति से पैदा संसद का सियासी माहौल सुबह से ही गरमाया हुआ नजर आया। कारण यह भी था कि सपा के वरिष्ठ सांसद मोहन सिंह द्वारा की गई कठोर टिप्पणी से अध्यक्ष का पक्ष दो दिन से कमजोर होता गया।

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  • Web Title: सोम को सांसदों के नाथ बने सोमनाथ