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पेटी कान्ट्रैक्टरों से काम कराना महंगा पड़ा

छोटे-छोटे पेटी कांट्रेक्टरों से काम कराना तांतिया कांस्ट्रक्शन कंपनी को काफी महंगा पड़ा है। छोटे ठेकेदारों के चक्कर में ठेकेदारी तो गई ही कंपनी की साख भी गिरी। अगर समय रहते तांतिया कुछ ओहदेदारों की बात मान लेता तो उसकी ऐसी गत नहीं होती। सड़क निर्माण का काम प्रारंभ करते ही तांतिया पर अंदरूनी आरोप लगने शुरू हो गये थे। दीगर बात है कि इस आरोप के पीछे कई स्वार्थसिद्धी के कारण भी छिपे थे।ड्ढr ड्ढr विभागीय सूत्रों के अनुसार कंपनी से सड़क निर्माण का ठेका वापस लेने की बहुत पहले से अंदर-अंदर खिचड़ी पक रही थी। सड़क निर्माण के दौरान आने वाली बाधाओं को निर्धारित समय सीमा के अंदर दूर नहीं करना इसी खिचड़ी का एक हिस्सा था। कंपनी और ओहदेदारों के बीच कभी मधुर संबंध नहीं रहे। समय-समय पर पेटी कांट्रेक्टर बदलने के लिए कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा था। यानी ..थोड़ा आप थोड़ा हम के फामरूले के तहत काम करने को लेकर ओहदेदारों और तांतिया के बीच खींचातानी बहुत पहले से शुरू थी। ओहदेदार अपनी बात पर अड़े थे और तांतिया अपनी बात पर। धीर-धीर दोनों के बीच कड़वाहट बढ़ने लगी। इसी बीच स्कोप मिनिमाइज करने के लिए तांतिया से पांच रोड का ठेका छीन लिया गया। पटना शहर रोड प्रोजेक्ट के प्राक्कलन और स्पेसिफिकेशन में बराबर फेरबदल किया जाता रहा।ड्ढr इसी बीच निजाम बदल गया लेकिन विभाग की कार्यशैली नहीं बदली और मामले ने तूल पकड़ लिया। नतीजतन कंपनी को ठेकेदारी से हाथ धोना पड़ा। इस दौरान सभी मामलों को गुप्त रखने के लिए काफी शतर्कता बरती जा रही थी। मामला ऊपर तक न पहुंचे इसकी भी कोशिश की जा रही थी। सूत्रों की माने तो अगर तांतिया समय-समय पर पेटी कांट्रेक्टर बदलने के लिए तैयार हो जाता तो ठेकेदारी से हाथ नहीं धोना पड़ता।ड्ढr ड्ढr तांतिया कोर्ट मेंड्ढr पटना (वि.सं.)। तांतिया कंस्ट्रक्शन ने ठेका रद्द किए जाने पर अब अदालत की शरण ली है। अधिवक्ता एस.डी. संजय ने कम्पनी की ओर से पटना हाईकोर्ट में एक रिट याचिका सोमवार को दयार की। कम्पनी ने राज्य सरकार द्वारा ठेका रद्द किए जाने सम्बन्धी आदेश की वैद्यता को चुनौती देते हुए कहा है कि करार के मुताबिक जरुरी सुविधा मुहैया कराय बिना सरकार ने एकतरफा निर्णय लिया है। जिसे कानूनी रूप से वैद्य नहीं ठहराया जा सकता। कम्पनी ने अपनी अर्जी में कहा है कि सरकार के एकतरफा निर्णय से न केवल करोड़ो रूपए का नुकसान हुआ है। बाल्कि उसकी छवि भी धूमिल हुई है।

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  • Web Title: पेटी कान्ट्रैक्टरों से काम कराना महंगा पड़ा