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जीवनशैली बदलें, हमेशा जवान बने रहें

आज हर इंसान चाहे मर्द या औरत सबकी एक हीं ख्वाहिश रहती है कि लम्बे समय तक जवान रहें तथा रोग मुक्त रहें लेकिन सिर्फ चाहत रखने से मंजिल नहीं मिलती वरना इसका अनुवाद कर्म क्षेत्रों में करना होगा। आज इस भौतिकवाद के मायाजाल में, संपन्नता के चकाचौंध में हम भागते नजर आते हैं लेकिन दुर्भाग्यवश यही भागदौड़ हमें बीमारियों का निमंत्रण देता है। देर रात तक पार्टियां, सबेर देर तक सोना, उठते ही चाय पीने के साथ तैयार होकर घुड़दौड़ में शामिल। परिणाम, 30 या 35 साल की उम्र आते-आते आप करोड़ों के मालिक वन जाते हैं, लम्बी गाड़ियां, आलीशान बंगला, दर्जनों कड्रिट, कार्ड, विदेशी भ्रमण के अनगिनत अवसर, राजनीतिक रसूख, लेकिन बदले में कुछ और उपहार मिल जाते हैं-डायबिटीज, हार्ट अटैक, उच्चरक्त चाप, अवसाद, नींद नहीं आना, पाचन की गड़बड़ी तथा कैंसर।ड्ढr ड्ढr आप रोज सबेर या शाम भ्रमण की आदत को अपनाएं। रोजाना एक घंटे का भ्रमण सबसे सस्ता एवं कारगर व्यायाम है। सबसे पहले, आप डायबिटीज जो सार बीमारियों का जनक है, से बच सकते हैं। यह एक तथ्य है कि लगातार सिर्फ भ्रमण की आदत लग जाए तो डायबिटीज के आगमन को आप पूरी तरह से रोक सकते हैं। डायबिटीज से अगर आप ग्रस्त हो गये हैं तो आप इससे संबंधित हृदय रोग तथा अन्य कमजोरियों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ-साथ प्रात: कालीन भ्रमण से एक ताजगी, जोड़ों के दर्द में राहत, मायूसी एवं अवसाद से निजात, पाचन क्रिया की उत्कृष्टता उच्चरक्त चाप पर नियंत्रण, अच्छी नींद तथा कुछ कैंसर के आगमन पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस भ्रमण को पार्क में सूर्योदय भ्रमण के रूप में किया जा सकता है क्योंकि सूर्योदय के बाद, पौधों के द्वारा प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन का प्रवाह होता है जो एक ऑक्सीजन बैंक का निर्माण करता है तथा फेफड़ों एवं हृदय को एक नयी ऊर्जा से भर देता है। साथ-साथ कहीं किसी से मिलने गए या बड़े होटलों के सम्मेलन में लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं कर, सीढ़ियों से चढ़ें। 10 मिनट तक अगर आप सीढ़ी पर चढ़ते हैं तो यह 30 मिनट के भ्रमण के बराबर देता है। छोटी-छोटी आदतें स्वास्थ्य का माध्यम बनती हैं जैसे टेलीफोन पर बात करते समय खड़े या टहलना, आफिस से कुछ दूर पर गाड़ी पार्क कर थोड़ा पैदल चलकर पहुंचना, बागवानी की आदत डालना तथा बच्चों के साथ कभी-कभी खेलकूद की आदत डालना। खानपान के महत्व को नजर अंदाज नहीं किये जा सकता तथा कथित फास्ट फूड जैसे पिज्जा, बर्गर, पावभाजी इस फास्ट जीवन के संबल बन गये हैं लेकिन ये आपकी बीमारी की यात्रा को भी फास्ट कर देते हैं। इनमें ‘‘ट्रांसफैट’’ की मात्रा ज्यादा होती है जो सीधे हृदय की की धमनियों में थक्का बनाकर ‘‘हार्ट अटैक’’ पैदा करता है। खतरनाक ‘‘ट्रांसफैट’’ सामान्य फैट यानी वसा से दस गुणा खतरनाक है। बिस्कुट, केक, पेस्ट्री, चिप्स सभी में ट्रांसफैट प्रचुरता से है। बच्चों के हाथों में कोल्ड ड्रिंक की बड़ी-बड़ी बोतलें एवं चिप्स के बड़े-बड़े पैकेट आने वाली पीढ़ियों में डायबिटीज एवं हार्ट अटैक के विस्फोट की कहानी का सृजन करते हैं। इसलिए खुद को बचाएं एवं अपने बच्चों को इन खलनायकों से दूर रखें। बच्चों में फैलती हुई दूरदर्शन संस्कृति आज बढ़ती हुई डायबिटीज की भयावहता की पोषक है। स्कूल से लौटता हुआ बच्चा चिप्स एवं कोल्ड ड्रिंक्स के साथ टीवी से जुड़ जाता है। परिणामत: बच्चों में मोटापा। इसके अलावा अपने कमर के घेर पर रोज नजर रखें। किसी भी तरह पुरुषों में 36 इंच तथा स्थितियों में 34 इंच से बढ़ने न दें। क्योंकि का घेरा बढ़ा तो डायबिटीज की संभावना भी बढ़ी। इसलिए पेट के मोटापे को नियंत्रित करना सीखें।

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