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सब जगह एक ही चर्चा बरसात में क्या होगा!

अर अब सड़क का क्या होगा कौन जाने? कंकड़बाग की तरफ से आयेंगे तो दो घंटे से कम समय नहीं लगेगा। सभी सड़कें खोद कर छोड़ दी गईं हैं। बरसात में तो और बुरी गत होगी। अनीसाबाद की सड़क तो ठीक है न? नहीं उधर भी सड़क खोद दी गईं हैं। गुलबी घाट (शमशान घाट) पर बाकरगंज व पटना सिटी के कुछ लोग अपने परिान की अंतिम क्रिया करने के दौरान इसी चर्चा में मशगूल दिखाई पड़े। घर हो या कार्यालय, खाने की टेबल हो या फिर सोने का बिस्तर। सभी जगह एक ही चर्चा है।ड्ढr ड्ढr बरसात में शहर का क्या होगा। इतने कम समय में कौन बनाएगा सड़कों को। बस अड्डे व रलवे स्टेशन पर भी इसी तरह की चर्चाएं की जा रही हैं। गली-मुहल्ले और चौक-चौराहे भी इससे अछूते नहीं हैं। सभी के जेहन में एक ही सवाल है 16 महीने से कहां सोए थे अधिकारी। जून में वर्षा शुरू हो जाएगी और गड्ढे जानलेवा बन जायेंगे। राजधानीवासियों को बस एक ही चिंता खाये जा रही है कि बरसात में वे कैसे सुरक्षित सड़क पर चलेंगे। तमाम सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। वैसे भी राजधानी का ड्रेनेज व सीवरा सिस्टम ध्वस्त रहने के कारण भीषण जलजमाव होता है। बरसात में टूटे मैनहोल और कैचपिट से बचकर घर से बाहर निकलने पर सुरक्षित वापस लौटना किसी जंग जीतने से कम नहीं था। इस बरसात में सड़क के गड्ढों से कैसे बचेंगे लोगों की समझ में नहीं आ रहा है। व्यवसायी अपनी दुकानों को लेकर चिंतित हैं। दुकान के आगे खोदे गये गड्ढे बरसात से पहले नहीं भर गये तो दो महीने तक दुकान बंद करनी पड़ेगी।

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